प्रोस्टेट कैंसर पर किए गए एक नए अमेरिकी अध्ययन ने चिंता बढ़ाने वाले संकेत दिए हैं। एनवाईयू लैंगोन हेल्थ और एनवाईयू ग्रॉसमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने पाया है कि प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित लगभग 10 में से 9 पुरुषों के ट्यूमर में माइक्रोप्लास्टिक मौजूद था और कैंसरग्रस्त ऊतकों में पास के स्वस्थ प्रोस्टेट टिश्यू की तुलना में औसतन करीब 2.5 गुना अधिक प्लास्टिक पाया गया।
शोधकर्ताओं के अनुसार यह पश्चिमी देशों में किया गया पहला ऐसा अध्ययन है जिसमें सीधे प्रोस्टेट ट्यूमर के भीतर प्लास्टिक कणों को मापा गया है। यह जांच एनवाईयू लैंगोन हेल्थ के पर्लमटर कैंसर सेंटर और एनवायरनमेंटल हैजर्ड्स में की गई। सेंटर फॉर द इन्वेस्टिगेशन ऑफ टीम ने प्रोस्टेट ग्रंथि हटाने की सर्जरी करा रहे 10 मरीजों के टिश्यू सैंपल्स का अध्ययन किया।
परिणामों के मुताबिक ट्यूमर सैंपल्स के 90% हिस्से में माइक्रोप्लास्टिक मिला, जबकि गैर-कैंसरयुक्त (बेनाइन) प्रोस्टेट टिश्यू के 70% नमूनों में भी प्लास्टिक कण मौजूद थे। मात्रा के स्तर पर फर्क और ज्यादा स्पष्ट था।कैंसरग्रस्त टिश्यू में औसतन प्रति ग्राम करीब 40 माइक्रोग्राम प्लास्टिक पाया गया, जबकि स्वस्थ टिश्यू में यह आंकड़ा लगभग 16 माइक्रोग्राम प्रति ग्राम रहा। शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की कि क्या माइक्रोप्लास्टिक का संपर्क इस बीमारी के विकास में भूमिका निभा सकता है l
ट्यूमर में अधिक प्लास्टिक, संभावित जोखिम कारक की ओर इशारा : अध्ययन की प्रमुख लेखिका और एनवाईयू ग्रॉसमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन में यूरोलॉजी व पॉपुलेशन हेल्थ विभाग की प्रोफेसर डॉ. स्टेसी लोएब ने कहा, हमारा यह पायलट अध्ययन महत्वपूर्ण सबूत देता है कि माइक्रोप्लास्टिक का सम्पर्क प्रोस्टेट कैंसर के लिए एक संभावित जोखिम कारक हो सकता है। लोएव ने बताया कि पहले के शोध माइक्रोप्लास्टिक को हृदय रोग और डिमेंशिया जैसी स्थितियों से जोड़ चुके हैं, लेकिन प्रोस्टेट कैंसर से सीधे संबंध दिखाने वाले प्रमाण बेहद सीमित थे। यह अध्ययन अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लिनिकलऑन्कोलॉजी के जेनिटोयूरिनरी कैंसर सिम्पोजियम में प्रस्तुत किया जाएगा।
