अमेरिकी उपविदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडो ने कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इसे लेकर अमेरिका बेहद उत्साहित है लेकिन समझौते पर बातचीत में अमेरिकी हित हमेशा सबसे पहले रहेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत को यह समझना चाहिए कि हम वही गलतियां दोहराने नहीं जा रहे जो हमने 20 साल पहले चीन के साथ की थीं।
अमेरिका भारत को वैसी आर्थिक छूट या फायदे नहीं देगा, जैसे उसने 20 साल पहले चीन को दिए थे। रायसीना डायलॉग में लैंडो ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ चीन जैसी गलतियों को नहीं दोहराएगा जिनकी वजह से बीजिंग एक प्रतिस्पर्धी बन गया। ऐसा नहीं है कि हम आपको इन बाजारों को विकसित करने देंगे। फिर अगली बात यह है कि आप हमें बहुत सी कमर्शियल चीजों में पछाड़ रहे हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हम जो भी करें, वह हमारे लोगों के लिए सही हो क्योंकि आखिरकार हम अपने लोगों के प्रति जवाबदेह हैं, ठीक वैसे ही जैसे भारत सरकार अपने लोगों के प्रति जवाबदेह है।
अमेरिका प्रथम का मतलब साफ तौर पर सिर्फ अमेरिका नहीं : प्रशासनिक रुख के बारे में गलतफहमियों को दूर करते हुए उन्होंने कहा कि मैं यहां सामाजिक कार्य या दान करने नहीं आया हूं। मैं यहां इसलिए आया हूं क्योंकि यह हमारे हित में है और हमें लगता है कि भारत के हित में भी है, कि हम अपने संबंधों को और प्रगाढ़ करें। यह पारस्परिकता और आपसी सम्मान पर आधारित होना चाहिए। अमेरिका प्रथम का मतलब साफ तौर पर सिर्फ अमेरिका नहीं है, क्योंकि इन मकसदों को पूरा करने का एक तरीका दूसरे देशों के साथ मिलकर काम करना है ।
