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देश के नन्हे नायक: जान बचाने से सीमा सेवा तक, बाल पुरस्कार से सम्मान

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमा पर डटे जवानों को पानी, दूध, लस्सी पिलाने वाले पंजाब के फिरोजपुर के गांव चक तरण वाली के श्रवण सिंह (10) को राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान किया। श्रवण को यह पुरस्कार सामाजिक सेवा की श्रेणी में दिया गया।

 

सामाजिक सेवा में ही चंडीगढ़ के 17 वर्ष के वंश तायल को भी यह पुरस्कार मिला। दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में हुए समारोह में राष्ट्रपति ने बच्चों को सम्मानित किया। वहीं खुद आठ साल की उम्र में तमिलनाडु की ब्योमा को छह साल की बच्ची को करेंट से बचाने और बिहार के 11 वर्षीय कमलेश को दोस्तों को बचाते वक्त जवान गंवाने के लिए मरणोपरांत बाल पुरस्कार प्रदान किया गया। व्योमा का पुरस्कार उनकी मां अर्चना शिवरामकृष्णन ने ग्रहण किया। कमलेश का पुरस्कार भी उनके अभिभावकों ने लिया। पर्यावरण के क्षेत्र में दो पुरस्कार दिए गए, जिसमें उत्तर प्रदेश की पूजा (17) और असम की ऐशीप्रिया बोहरा (10) शामिल हैं। इस क्रम में शिवानी होशुरू (17) को आंध्र प्रदेश से, अनुष्का कुमारी (14) को झारखंड से, योग्यता मांडवी (14) को छत्तीसगढ़ से और वाका लक्ष्मी प्रज्ञा (7) गुजरात से पुरस्कृत किया गया है।

 

प्रौद्योगिकी के लिए महाराष्ट्र की 17 वर्षीय अरनव अनुप्रिया महषी को पुरस्कृत किया गया। इन्होंने दो एआई सॉफ्टवेयर की उंगलियों और हाथों के मूवमेंट में मदद करते हैं। इनको भारत सरकार ने पेटेंट और कॉपीराइट भी किया है।।

 

पिता को मगरमच्छ से बचाने वाले यूपी के अजय भी सम्मानित वीरता की श्रेणी में उत्तर प्रदेश के 16 वर्षीय अजय राज को सम्मानित किया गया। उन्होंने अपने पिता की मगरमच्छ से बचाया। इसी क्रम में केरल निवासी 11 साल के मोहम्मद सिद्दान को अपने दो दोस्तों की जान करंट लगने से बचाने के लिए सम्मानित किया गया।

 

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