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माघ मेले में इतिहास रचेंगी किन्नर संत, पहली बार पूरे विधि-विधान से करेंगी कल्पवास

पौष शुक्ल एकादशी के पावन अवसर पर माघ मेले में कल्पवासियों का आगमन शुरू हो गया है। गंगा-यमुना के पवित्र संगम तट पर नियम, संयम और साधना के साथ एक माह तक चलने वाले कल्पवास की परंपरा में इस बार एक नया अध्याय जुड़ रहा है। पहली बार किन्नर अखाड़े की 25 संत माघ मेले के दौरान पूरे विधि-विधान से कल्पवास करेंगी।

 

प्रयाग क्षेत्र में कल्पवास की परंपरा अत्यंत प्राचीन मानी जाती है। पौष शुक्ल पूर्णिमा तीन जनवरी से अनुमानित 20 से 25 लाख श्रद्धालुओं का कल्पवास आरंभ होगा जो माघ पूर्णिमा एक फरवरी तक चलेगा। इस अवधि में श्रद्धालु संगम तट पर संयमित जीवन व्यतीत करते हुए साधना, स्नान और दान-पुण्य करेंगे।

 

किन्नर अखाड़े की 26 वर्षीय हर्षिता नंद गिरि ने बताया कि गुरु मां की इच्छा से वह पहली बार कल्पवास करने जा रही हैं। उन्होंने कहा कि कल्पवास की इस परंपरा की नई शुरुआत करने का संकल्प लिया गया है। पूरे एक माह तक सभी धार्मिक विधि-विधानों का पालन किया जाएगा।

 

वहीं, किन्नर अखाड़े की 25 वर्षीय शिवानी नंद गिरि ने कहा कि मन में लंबे समय से कल्पवास करने की भावना थी। इस बार शिविर में रहकर एक माह तक कल्पवास करने का निर्णय लिया है।

उन्होंने बताया कि उनके साथ कई अन्य राज्यों और प्रदेशों से भी किन्नर समाज के लोग कल्पवास के लिए प्रयागराज पहुंच रहे हैं।

 

किन्नर अखाड़े की गुरु मां ने बताया कि ब्रह्म पुराण के अनुसार पौष शुक्ल एकादशी से माघ शुक्ल एकादशी तक कल्पवास का विधान बताया गया है। इसका पालन माघ मेले में श्रद्धालुओं द्वारा सदियों से किया जाता रहा है।

 

 

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