Homeप्रदेशअपराधों में नकेल कसी योगी आदित्य नाथ ने

अपराधों में नकेल कसी योगी आदित्य नाथ ने

यूपी में फैले भ्रष्टाचार पर योगी के सख्त कदम

उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने के कुछ महीने ही बीते थे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोंडा में बड़े पैमाने पर अवैध खनन की शि‍कायतें मिलने लगी थीं. मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी ने आईएएस अधि‍कारी जे.बी. सिंह को गोंडा का जिलाधि‍कारी बनाया था. अवैध खनन न रुकने के बाद मुख्यमंत्री योगी ने गोंडा के जिलाधि‍कारी और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को चेतावनी दी. गोंडा के तीन थानाध्यक्षों और एक खान निरीक्षक को निलंबित भी किया. दो-दो तहसीलों के एसडीएम और सीओ के खि‍लाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की गई. मुख्यमंत्री योगी के इतने सख्त ऐक्शन के बावजूद गोंडा में अवैध खनन नहीं रुका. जिले के जनप्रति‍निधि‍ मुख्यमंत्री और शासन के अफसरों से मिलकर जिले में प्रशासनिक शि‍थि‍लता और सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी की शि‍कायत करते आ रहे थे.
इसी बीच मुख्यमंत्री योगी 18 मई, 2018 को गोंडा के मनकापुर गए थे. यहां की खुली जनसभा में उन्हें जिले में बड़े पैमाने पर खाद्यान्न वितरण में गड़बड़ी की जानकारी मिली. मुख्यमंत्री योगी ने अफसरों को अगाह किया लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ. इसके बाद 27 मई 2018 को गोंडा के वजीरगंज स्थित एक व्यापारी के गोदाम पर तरबगंज से विधायक प्रेमनारायण पांडेय ने गुप्त सूचना के आधार पर उपजिलाधि‍कारी को साथ लेकर छापा मारा. गोदाम से 9,142 बोरी खाद्यान्न बरामद हुआ. गोदाम को सील कर दिया गया. मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपने स्तर पर पूरे प्रकरण की जांच कराई तो पता इसमें गोंडा जिला प्रशासन की लापरवाही सामने आई. कड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी ने गोंडा के तत्कालीन जिलाधि‍कारी जे. बी. सिंह को 7 जून, 2018 को निलंबित कर दिया.
खाद्यान्न वितरण में निलंबित होने वाले गोंडा के जिलाधि‍कारी जे. बी. सिंह अकेले नहीं थे. 7 जून, 2018 को मुख्यमंत्री योगी ने फतेहपुर के तत्कालीन जिलाधि‍कारी कुमार प्रशांत को भी निलंबित कर दिया था. मुख्यमंत्री योगी को दिसंबर, 2017 से ही फतेहपुर में अवैध खनन और खाद्यान्न में गड़बड़ी की शि‍कायत मिल रही थी. इसके लिए मुख्यमंत्री कार्यालय ने फतेहपुर के तत्कालीन जिलाधि‍कारी कुमार प्रशांत को चेतावनी भी जारी की. इसके बाद भी हालात न सुधरने पर योगी सरकार ने फतेहपुर के सर्किल अफसर (खागा), धाता थाने के एसएचओ और खान अधि‍कारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था. इसके बाद फतेहपुर में धान खरीद में धांधली की शि‍कायत मिली तो सरकार ने मई, 2018 को विशेष सचिव (खाद्य) के पद पर तैनात अभिषेक सिंह और अपर आयुक्त (खाद्य) संतोष कुमार को फतेहपुर में गेहूं खरीद केंद्रों की जांच का जिम्मा सौंपा. इन अधि‍कारियों की जांच रिपोर्ट में फतेहपुर में गेहूं खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी की पुष्टि‍ हुई. इसी रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री योगी ने 7 जून, 2018 को फतेहपुर के तत्कालीन जिलाधि‍कारी कुमार प्रशांत को निलंबित कर दिया.

मुख्यमंत्री योगी ने 7 जून, 2018 को निलंबित हुए गोंडा के जिलाधि‍कारी जे. बी. सिंह और फतेहपुर के जिलाधि‍कारी कुमार प्रशांत को राजस्व विभाग से अटैच कर दिया. करीब ढाई महीने बाद जे. बी. सिंह का निलंबन बहाल हुआ और वह 24‍6 अगस्त 2018 को वे गृह एवं कारागार विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात हुए. जे. बी. सिंह करीब चार महीने तक इस पद पर रहे. इसके बाद 15 फरवरी, 2019 को योगी सरकार ने उन्हें एक बार फि‍र जिलाधि‍कारी की कुर्सी सौंप दी. इस बार उन्हें गोंडा से कहीं अधि‍क महत्वपूर्ण इटावा का जिलाधि‍कारी बनाया गया. इटावा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखि‍लेश यादव का गृह जिला है. पिछले 18 महीने से जे. बी. सिंह इटावा के जिलाधि‍कारी के रूप में तैनात हैं. फतेहपुर के जिलाधि‍कारी पद से निलंबित हुए कुमार प्रशांत को भी ज्यादा दिनों तक खाली नहीं रहना पड़ा. 24 अगस्त, 2018 को इन्हें आइटी और इलेक्ट्रानिक्स विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात कर दिया गया. इसके बाद 11 अक्तूबर, 2019 को कुमार प्रशांत को फतेहपुर से अधि‍क महत्वपूर्ण जिले बदायूं का जिलाधि‍कारी बना दिया गया. बदायूं समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और अखि‍लेश यादव के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव का राजनीतिक क्षेत्र है. धमेंद्र बदायूं के पूर्व सांसद हैं.
नाम न छापने की शर्त पर यूपी के मुख्य सचिव कार्यालय में तैनात एक वरिष्ठ अधि‍कारी बताते हैं कि आंतरिक सरकारी जांच में जे. बी. सिंह और कुमार प्रशांत पर सीधे तौर पर किसी गड़बड़ी में लिप्त होने का प्रकरण सामने नहीं आया था इसलिए इन दोनों अधि‍कारियों को क्लीनचिट दे दी गई थी. भ्रष्टाचार के आरोप पर अधि‍कारियों का निलंबन और फि‍र उन्हें प्राइम पदों पर तैनात करने को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र विभाग में सहायक प्रोफेसर और यूपी की अफसरशाही पर रिसर्च करने वाले ज्ञानेंद्र कुमार पांडेय बताते हैं, “अगर सरकार ने किेसी अधि‍कारी को एक रिपोर्ट के आधार पर निलंबित किया है और बाद में दूसरी रिपोर्ट के आधार पर निलंबन समाप्त कर बेहतर पोस्टिंरग दे दी है तो इससे दो बातें सामने आती हैं. या तो पहली रिपोर्ट गड़बड़ थी जिसके आधार पर अधि‍कारी का निलंबन हुआ या दूसरी रिपोर्ट सही नहीं है जिसके आधार पर अधि‍कारी बहाल हुआ.” अधि‍कारी को निलंबित करने के बाद उसे और अच्छी पोस्टिंग देने पर जनता के बीच गलत संदेश जाने की बात भी लोक प्रशासन के जानकार कह रहे हैं. लखनऊ विश्वविद्यालय में लोक प्रशासन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर संजीव गुप्ता बताते हैं, “निलंबन के कुछ समय बाद अधि‍कारियों को अच्छी पोस्टिंग मिल जाने से इनपर सरकार का खौफ खत्म होने लगता है. इससे ईमानदार अधि‍कारियों में नकारात्मकता का भाव पैदा होता है जिसका असर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर पड़ता है.”राजनीति के जानकार लोग अधि‍कारियों के निलंबन को सरकार द्वारा ‘सेफ्टी वॉल्व’ के तौर पर उपयोग किए जाने की बात भी कहते हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र विभाग के पूर्व प्रोफेसर आर. के. कुशवाहा बताते हैं, “कई बार किसी मुद्दे के तूल पकड़ने पर मुख्यमंत्री गलती न होने पर भी जिलाधि‍कारी को निलंबित या उसका तबादला कर कड़ी कार्रवाई करने का संदेश देते हैं. बाद में मामला शांत होने पर उस अधि‍कारी को अच्छे पद पर तैनात कर दिया जाता है.” निलंबित अधि‍कारियों को बाद में अच्छी पोस्टिंग दिए जाने के विषय पर यूपी सरकार के जिम्मेदार अधि‍कारी कुछ कहने से बचते हैं. सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मनोज मिश्र कहते हैं, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालते ही यूपी में भ्रष्टाचार के खि‍लाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है. अगर किसी ने भ्रष्टाचार किया है तो सरकार ने उसपर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की है. चाहे वह जिलाधि‍कारी हो या फि‍र कोई अन्य अधि‍कारी.”

इन मामलों में भी कार्रवाई की रस्म अदायगीः

बाराबंकी में ट्रेडिंग कंपनी के अधि‍कारियों से 65 लाख रुपए वसूलने के आरोप में जिले के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सतीश कुमार को यूपी सरकार ने 4 अप्रैल, 2019 को निलंबित कर दिया था. तीन महीने बाद ही सतीश कुमार का निलंबन खत्म कर दिया गया. इन्हें जालौन का एसपी बनाया गया. 26 जुलाई को इन्हें जालौन के एसपी पद से हटाकर सेनानायक, स्टेट डिजास्टर रेस्पांस फोर्स (एसडीआरएफ) के पद पर तैनात किया गया है.

गौतमबुद्ध नगर के पूर्व एसएसपी वैभव कृष्ण की ओर से गाजियाबाद के पूर्व एसएसपी सुधीर कुमार सिंह समेत पांच आइपीएस अफसरों पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप की गोपनीय रिपोर्ट सोशल मीडिया में वायरल हुई थी. इसके बाद इसी वर्ष 9 जनवरी को सरकार ने सुधीर कुमार सिंह का तबादला कर उन्हें 15वीं वाहिनी पीएसी आगरा में तैनात कर दिया. इसके बाद सुधीर कुमार सिंह को एसएसपी एसटीफ बनाया गया. 17 अगस्त को सुधीर कुमार सिंह का आजमगढ़ का एसएसपी बना दिया गया.

पुलिस अधि‍कारियों के भ्रष्टाचार में लिप्त होने संबंधी आरोप वाले गौतमबुद्ध नगर के पूर्व एसएसपी वैभव कृष्ण के वायरल वीडियो के सही पाये जाने पर प्रदेश सरकार ने 9 जनवरी को वैभव कृष्ण को निलंबित कर दिया था. वैभव ने जिन आइपीएस अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे उनकी प्रारंभि‍क पुष्टि‍ होने पर बांदा के एसपी गणेश पी साहा समेत पांच पुलिस अधि‍कारियों को उनके पद से हटा दिया था. गणेश पी साहा एसपी मानवाधिकार बनाए गए और 16 अगस्त को इन्हें गौतमबुद्ध नगर का उपायुक्त बना दिया गया.

रिपोर्ट- कुंवर वैभव सिंह

Freedom News
Freedom Newshttps://freedomnews.in
Now get the fairest, reliable and fast news, only on Freedom News.in. Find all news related to the country, abroad, sports, politics, crime, automobile, and astrology in Hindi on Freedom News.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments