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विकास कार्यों में क्षेत्रीय झुकाव: ज्यादातर मनोनीत सांसदों ने अपने प्रदेश को दी प्राथमिकता

राज्यसभा में इस समय 12 मनोनीत सांसद हैं। सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड) के तहत इन सांसदों की ओर से की गई विकास कार्यों की सिफारिशों का विश्लेषण करने पर सामने आता है कि गुलाम अली खटाना को छोड़कर लगभग सभी सांसदों ने अपने गृह राज्य या आसपास के क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है।

12 में से चार मनोनीत सांसद ऐसे हैं जिन्होंने अपनी सांसद निधि से 100 फीसदी विकास कार्य अपने गृह राज्य में ही दिए हैं। कुछ सांसदों ने अपने राज्य के अलावा अन्य प्रदेशों में शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े सीमित कार्यों की सिफारिश की है। दिल्ली से मनोनीत सांसद मीनाक्षी जैन ने अपनी सांसद निधि से किए गए सभी छह विकास कार्य दिल्ली में ही सुझाए हैं। इसी तरह तमिलनाडु से सांसद इलैयाराजा ने 27, केरल से सांसद पीटी उषा ने 103 और केरल से ही सांसद सदानंद मास्टर ने 38 विकास कार्यों की सिफारिश की है। ये सभी कार्य संबंधित सांसदों के गृह राज्यों में ही होने हैं।

कर्नटक से सांसद सुधा मूर्ति ने कुल नौ विकास कार्यों की सिफारिश की है, जिनमें से आठ कर्नाटक में, जबकि एक कार्य दिल्ली में कर्नाटक संघ के सांस्कृतिक भवन से जुड़ा है। कर्नाटक से ही मनोनीत सांसद वीरेंद्र हेगड़े ने कुल 466 विकास कार्यों की सिफारिश की है,  जिनमें से अधिकांश कर्नाटक में हैं, जबकि कुछ कार्य अन्य राज्यों में सुझाए गए हैं।

इन्होंने किसी काम की सिफारिश नहीं की: उज्ज्वल निकम और हर्षवर्धन श्रृंगला को वर्ष 2025 में राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था और अब तक उन्होंने सांसद निधि से किसी भी विकास कार्य की सिफारिश नहीं की है।

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