दारागंज में पेट्रोल पंप खोलने की असहमति पर हुआ आनंद का गुरु नरेंद्र गिरी से विवाद
1200 वर्ग गज जमीन पर आनंद गिरि के नाम किराएदारी का एग्रीमेंट निरस्त कराने को लेकर मचा घमासान

निरंजनी अखाड़े से निष्कासन के बाद योग गुरु स्वामी आनंद गिरी और उनके गुरु अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के बीच विवाद और तीखा हो गया महंत नरेंद्र गिरि ने जहां एक ओर वित्तीय अनियमितता समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं वहीं दूसरी ओर आनंद गिरि सीधे तौर पर कुछ भी बोलने से बचते रहे। लेकिन इशारों इशारों में उन्होंने गुरु पर हमला बोला और कहां समय आने पर इसका खुलासा करेंगे।

निष्कासन के मुद्दे पर आनंद गिरि ने बताया कि मेरे साथ बड़ी साजिश रची गई है। कहने के लिए तो बहुत कुछ है लेकिन अभी इस प्रकरण या गुरु महंत नरेंद्र गिरि के बारे में कुछ नहीं बोलना चाहते फिलहाल इसके पीछे एक पेट्रोल पंप के विवाद का
मामला सामने आया है।
इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया में आनंद गिरि की गिरफ्तारी के दौरान उनके चार करोड रुपए डकारे जाने का भी मामला गुरु शिष्य के बीच झगड़े का कारण बताया जा रहा है। वही महंत नरेंद्र गिरि ने कहा आनंद गिरी के नाम से पेट्रोल पंप पास कराने के लिए अधिकारियों से कहा गया था उनके नाम से ही 1200 वर्ग गज भूमि का एग्रीमेंट किराएदार ई के आधार पर किया गया था। एनओसी भी मिल गई थी। इसके बाद जब मुझे फीडबैक मिला कि वहां पेट्रोल पंप नहीं चल पाएगा तब मैंने उस एग्रीमेंट को निरस्त कराने के लिए रजिस्ट्रार को लिखा। लेकिन आनंद गिरी उस जमीन पर किराएदारी का हवाला देते हुए छोड़ने के लिए तैयार नहीं हो रहे थे। एग्रीमेंट निरस्त कराने की बात आने पर वृंदावन चले गए मैं चाहता था कि उस जमीन पर मार्केट बसा दिया जाए जिससे मठ को आमदनी हो सके लेकिन आनंद गिरि इस पर तैयार होने की बजाय अनर्गल बातें करने लगे।
इसके साथ ही महंत नरेंद्र गिरि ने आनंद गिरि को सलाह दी है कि बहुत मौज मस्ती हुई फिलहाल कम से कम 3 वर्ष तक हिमालय की गुफा में जाकर साधना करें। इसके अलावा उन्होंने कहा कि बाघमबारी गद्दी मठ की 1 इंच जमीन नहीं बिकी है और ना ही बिकने दी जाएगी।

खबर नीतेश सोनी
