नई दिल्ली। लंदन में विदेश मंत्री एस जयशंकर की सुरक्षा में भारी चूक और तिरंगे के अपमान पर भारत ने एक बार फिर ब्रिटेन को खरी-खरी सुनाते हुए दोषियों पर सख्त कारवाई की मांग की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने घटना के बाद ब्रिटेन के विदेश विभाग के बयान को लीपापोती का प्रयास करार देते हुए कहा, ऐसे बयानों की ईमानदारी पर तभी विश्वास किया जा सकता है, जब सुरक्षा चूक में शामिल आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। ब्रिटेन के विदेश विभाग ने कहा था कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में बाधा डालने, डराने, धमकाने की ऐसी कोशिशें पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं। इस पर तंज कसते हुए जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि ब्रिटेन का विदेश विभाग अपने इस बयान पर खुद कितना विश्वास करता है?
जयसवाल ने कहा, सभी जानते हैं कि इन अलगाववादियों व उग्रवादियों के पीछे कौन हैं। इससे जुड़े संदर्भ को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा, यह घटना ऐसी ताकतों को इस तरह की हरकतें करने के लिए मिले लाइसेंस, और ब्रिटेन में हमारी वैध कूटनीतिक गतिविधियों में बाधा डालने के उद्देश्य से इन ताकतों की ओर से डराने और धमकाने के प्रति वहां की सरकार की उदासीनता को उजागर करती है। लंदन में खालिस्तान समर्थकों ने बुधवार रात प्रदर्शन किया था और एक अलगाववादी ने सुरक्षा घेरा तोड़कर जयशंकर की कार के सामने आकर तिरंगा फाड़ दिया था। इस दौरान सुरक्षाकर्मी मूकदर्शक बने रहे। विदेश मंत्री की सुरक्षा में बड़ी चूक पर भारत ने नई दिल्ली में ब्रिटिश उच्चायोग के प्रभारी को बुलाकर सख्त एतराज जताया था। उन्हें राजनयिक धर्म निभाने की नसीहत के साथ आपत्ति पत्र सौंपा गया था।
