नई दिल्ली। 17 साल की पायल नाग… बिना हाथ-पैर की
दुनिया की पहली तीरंदाज । जब कृत्रिम पैर में धनुष को फंसाकर दाहिने कंधे से तीर को खींचकर निशाना साधती हैं, तो उनकी प्रतिभा व हौसले को देख लोग आश्चर्य में पड़ जाते हैं। पायल बिना बाजुओं की तीरंदाज शीतल देवी को हराकर राष्ट्रीय पैरा तीरंदाज चैंपियन बन चुकी हैं। यही नहीं, ओडिशा के पुरी में सामान्य तीरंदाजों के बीच राष्ट्रीय रैंकिंग टूर्नामेंट में 8वां स्थान हासिल कर सबको चौंका दिया।
हौसले की मिसाल बनीं पायल के लिए सफर इतना आसान नहीं था। महज सात साल की उम्र में उनकी जिंदगी में ऐसा तूफान आया कि हर तरफ अंधेरा छा गया। मूलरूप से ओडिशा के बालंगीर की रहने वाली पायल के पिता छत्तीसगढ़ के रायपुर में राजमिस्त्री थे। जिस बिल्डिंग में काम कर रहे थे, उसकी दूसरी मंजिल पर खेलते समय पायल बिजली के नंगे तारों की चपेट में आ गईं। डॉक्टरों ने बचा तो लिया, पर उन्हें दोनों हाथ-पैर गंवाने पड़े। बालंगीर के डीएम को पता चला, तो उन्हें वहां के अनाथ आश्रम में भेज दिया। पायल के सपनों में उड़ान भरी माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड तीरंदाजी अकादमी में शीतल के कोच कुलदीप वेदवान ने। मई, 2023 में कुलदीप ने सोशल मीडिया पर उसकी फोटो देखी। उन्हें बालंगीर से कटड़ा ले आए। दो विशेष उपकरण बनवाकर उन्हें तीरंदाज बना दिया।
