प्रयागराज। मंझनपुर, कौशाम्बी के कृपाशंकर निरंकारी पांच साल से प्रशिक्षिक स्नातक शिक्षक (टीजीटी) और प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। कुछ साल पहले पिता लकवा से पीड़ित हो गए और अब बिस्तर पर हैं। पूरे घर का खर्च उनकी पेंशन से चलता है।
कृपाशंकर ने टीजीटी-पीजीटी 2021 की परीक्षा दी थी, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद वर्ष 2022 के विज्ञापन में आवेदन किया और अब तीन साल से परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं।
कृपाशंकर की तरह ऐसे कई अभ्यर्थी हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों या दूसरे जिलों से यहां आकर टीजीटी-पीजीटी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और बार-बार परीक्षा टलने के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
जौनपुर से परीक्षा की तैयारी करने आए विवेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि किराये का एक कमरा कम से कम 3,000 रुपये में मिलता है। रेस्टोरेंट में खाना महंगा पड़ता है, इसलिए कमरे में गैस का एक चूल्हा रखा है।
हाथ रोककर खर्च करने पर भी हर माह 3,000 रुपये राशन-पानी पर चले जाते हैं। कोचिंग के एक बैच पर 16 से 25 हजार रुपये तक खर्च होते हैं। तीन साल में ढाई से तीन लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।
फतेहपुर के राजेश बालाजी बताते हैं, पिता 85 साल के हो गए हैं और उम्र के आखिरी पड़ाव पर हैं। उनकी एक ही ख्वाहिश है कि बेटे को सरकारी नौकरी करते देख सकें। कुंडा, प्रतापगढ़ के रमेश कुमार ट्यूशन पढ़ाकर किसी तरह अपना खर्च चलाते हैं। घर से कब तक पैसा लेते रहेंगे। कहते हैं कि परीक्षा समयसे हो जाती तो आर्थिक संकट से न जूझना पड़ता।
अभ्यर्थियों का कहना है कि टीजीटी-पीजीटी का विज्ञापन नौ जून 2022 को जारी हुआ था। तीन साल से अधिक समय बीत चुका है और अब तक तीन बार परीक्षा टल चुकी है। बार-बार परीक्षा टलने से प्रयागराज में रहकर तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के सामने आर्थिक संकट भी बढ़ता जा रहा है। पीजीटी के 624 पदों के लिए 4.50 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए हैं, जिनमें से तकरीबन दो लाख अभ्यर्थी प्रयागराज में रहकर परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।
