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कोर्ट ने कहा- समान नागरिक संहिता पर विधायिका को करना चाहिए विचार, याची के खिलाफ शुरु की गई आपराधिक कार्यवाही पर रोक

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रारंभिक इस्लामिक काल में बहुविवाह समय की मांग थी। इतिहास में एक समय ऐसा था, जब अरब देशों में आदिम कबीलाई झगड़ों में बड़ी संख्या में महिलाएं विधवा हो गई थीं और बच्चे अनाथ हो गए थे। उन परिस्थितियों में इस्लाम ने अनाथ बच्चों और उनकी माताओं को शोषण से बचाने के लिए सशर्त बहुविवाह की अनुमति दी थी। अब पुरुष इसका दुरुपयोग कर रहे हैं। लिहाजा, मौजूदा हालात में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की जरूरत है। विधायिका को इस दिशा में विचार करना चाहिए। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत ने द्विविवाह के आरोपी मुरादाबाद निवासी फुरकान की याचिका विचारणीय मानी है। हालांकि, कोर्ट ने याची के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी। साथ ही सरकार व याची की पत्नी को नोटिस जारी कर जवाव-तलब किया है। कहा कि मौजूदा कानून के मुताबिक मुस्लिम पुरुष को बहुविवाह की इजाजत है। मामला मुरादाबाद के मैंथर थाना क्षेत्र का है। फुरकान पर उसकी पत्नी ने पहली शादी छिपा उससे दूसरी करने का आरोप लगा मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने दुष्कर्म सहित द्विविवाह की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र ट्रायल कोर्ट में दाखिल किया। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दाखिल आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए समन जारी किया था। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि इस्लाम धर्म के मुताबिक मुस्लिम पुरुष चार विवाह कर सकता है। यह गैर कानूनी नहीं है। लिहाजा, द्विविवाह की धाराओं में मुकदमा दर्ज करना व बतौर आरोपी अदालत में तलब किया जाने का आदेश अवैध है।

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