ग्राम पंचायत जलालाबाद… इसे पूर्वांचल का मिनी दुबई या फिर गल्फ वाला गांव बोलिए। करीब 20 हजार की आबादी वाले जलालाबाद के लगभग हर घर से एक या दो व्यक्ति इस समय दुबई में काम कर रहा या फिर वहां से लौट चुका है। गांव में झोपड़ियों की जगह लोगों के पक्के मकान बन चुके हैं। घरों में सिर्फ महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग रहते हैं।
दो साल के अनुबंध पर दुबई की कंपनियां लोगों की भर्ती करती हैं। गांव के 5 हजार से अधिक लोग इस समय दुबई में बढ़ई, राजमिस्त्री, मजदूर, पुताई का काम कर रहे हैं। करीब 35-40 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पाते हैं। दुबई में 20 साल तक कपड़ों की धुलाई का काम कर चुके राजेंद्र कन्नौजिया का जलालाबाद हाईवे किनारे पक्का मकान बना है। दोनों बेटे सुनील और अनिल पांच साल से दुबई में हैं। उनकी पत्नियां अपने-अपने मकान में रहती हैं।
सुनील जेसीबी चलाते हैं। अनिल मजदूरी करते हैं। राजेंद्र कन्नौजिया बताते हैं कि वह सात पहले लौट आए थे। पहले झोपड़ी थी, अब अपना मकान है। भाई विजय बहादुर और उनका गोलू, परिवार के कई लोग दुबई में हैं।
मियना बड़ा गांव के कारपेंटर राम नारायण चौहान 2023 से दुबई में हैं। बेटी की शादी के लिए तीन महीने की छुट्टी लेकर गांव आए हैं। शादी हो गई। अब दुबई जाने की तैयारी में हैं। राम नारायण बताते हैं, गांव के एजेंट सुरेंद्र चौहान के माध्यम से पहली बार दुबई गए थे। वहां पर भाई मुंशी, चाचा अच्छे लाल के अलावा परिवार के वकील और बब्बन भी हैं। सभी कारपेंटर का काम करते हैं। राम नारायण बताते हैं कि जिस कंपनी में वो काम करते हैं उसमें ज्यादातर लोग गाजीपुर, बनारस और आजमगढ़ के हैं। हर महीने पत्नी को रुपये भेजते हैं। इसके बाद भी 30 हजार रुपये महीने की बचत हो जाती है l
बेटी की शादी है, पति को नहीं मिल रही छुट्टी : मियना बड़ा गांव की रीना परेशान हैं। बेटी की शादी 25 अप्रैल को है। तीन साल से पति मुंशी चौहान घर नहीं आए। पति से रोज बात होती है। कागज पूरे नहीं होने के कारण छुट्टी नहीं मिल पा रही। रुपये की दिक्कत नहीं है, मगर पति की वापसी और बेटी की शादी की चिंता है। घर पर ससुर हैं।
पति-देवर लौटेंगे तो पड़ेगी मकान की पक्की छत : मियना गांव की ऊषा चौहान की दो साल पहले शादी हुई है। पति राजकुमार चौहान और देवर लखन चौहान एक साल पहले दुबई गए थे। वहां पर टाइल्स लगाने का काम करते हैं। ऊषा कहती हैं, पति हर महीने रुपये भेजते हैं। शादी से पहले झोपड़ी थी। पक्का मकान बन गया है। सिर्फ छत पड़नी बाकी है। पति और देवर जब वहां से लौटेंगे तो छत का काम पूरा कराएंगे।
