केंद्र सरकार के दखल के बाद प्रमुख ऑनलाइन डिलीवरी मंच ब्लिंकिट ने 10 मिनट में सामान पहुंचाने के दावे को अपने एप से हटा दिया है। जेप्टो और स्विगी भी बहुत जल्द इसका पालन कर सकती हैं।
केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने हाल ही में गिग वर्कर्स के हितों और डिलीवरी से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए ब्लिंकिट, जेप्टो, जोमैटो और स्विगी समेत अन्य प्रमुख प्लेटफॉर्मों के अधिकारियों के साथ बैठक कर समयसीमा को खत्म करने के लिए कहा था।
ब्लिंकिट ने मंगलवार को अपनी टैगलाइन को 10 मिनट में 10,000 से अधिक प्रोडक्ट डिलीवर्ड से बदलकर आपके दरवाजे पर 30,000 से अधिक प्रोडक्ट डिलीवर्ड, कर दिया है। श्रम मंत्रालय ने समस्त एग्रीगेटरों से गिग वर्कर्स के लिए अधिक सुरक्षा, संरक्षा के साथ बेहतर कामकाजी माहौल बनाने की अपील की थी। दरअसल, 10 मिनट में डिलीवरी के वादे के चलते सड़क हादसे बढ़ रहे थे और नए साल की पूर्व संध्या पर गिग वर्कर्स ने देशव्यापी हड़ताल भी की थी। गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस यूनियन ने सरकार की पहल का स्वागत किया है। यूनियन ने कहा, यह अच्छा कदम है। इससे गिग कामगार सुरक्षा और स्वास्थ्य की बेहतरी सुनिश्चित होगी। गौरतलब है कि इस मुद्दे को लेकर यूनियन ने 12 जनवरी को ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत दी थी।
यह था दावा: ब्लिंकिट के स्वामित्व वाले इटरनल ग्रुप के सीईओ दीपेंद्र गोयल ने कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर दावा किया था कि 10 मिनट में डिलीवरी का वादा राइडर्स पर दबाव नहीं डालता, न ही असुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा देता है, क्योंकि एप पर उन्हें 10 मिनट का टाइमर नहीं दिखाया जाता है। 10 मिनट या उससे भी कम समय में डिलीवरी स्टोर ग्राहकों के करीब होने के कारण होती है, न कि सड़क पर वाहनों की तेज गति के कारण।
