नई दिल्ली। चीन की गोद में बैठकर भारत के खिलाफ टिप्पणी करना बांग्लादेश को भारी पड़ गया। भारत ने बांग्लादेश को दी जानी वाली माल हस्तांतरण सुविधा (ट्रांस-शिपमेंट) वापस ले ली है। अब बांग्लादेश भारत के रास्ते यूरोप और पश्चिम एशिया के देशों के साथ व्यापार नहीं कर पाएगा। हालांकि, वह भूटान व नेपाल के साथ भारत के रास्ते व्यापार जारी रख सकेगा। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस की हाल में पूर्वोत्तर भारत को लेकर की गई टिप्पणी के बाद नई दिल्ली ने यह कदम उठाया है। सुविधा बंद होने से बांग्लादेश के निर्यात व आयात पर खासा असर पड़ेगा। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड और सीमा शुल्क बोर्ड के सर्कुलर में इस फैसले की जानकारी दी गई। साल 2020 से जारी इस व्यवस्था के तहत बांग्लादेश के उत्पादों को भारत के रास्ते दूसरे देशों में भेजने की अनुमति दी गई थी। यह सामान जमीन के रास्ते भारतीय बंदरगाहों और हवाईअड्डों तक पहुंचता था। इसका मकसद था कि बांग्लादेश आसानी से पश्चिम एशिया, यूरोप, भूटान, नेपाल और म्यांमार जैसे देशों को निर्यात कर सके। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, भारतीय क्षेत्र से नेपाल या भूटान को बांग्लादेश के निर्यात पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पश्चिम एशिया, यूरोप और अन्य देशों को निर्यात के लिए बांग्लादेश को दी गई ट्रांस-शिपमेंट सुविधा वापस ली गई है। भारतीय कारोबारियों खासकर वस्त्र-परिधान क्षेत्र के निर्यातकों ने सरकार से यह सुविधा वापस लेने का आग्रह किया था। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के प्रमुख अजय श्रीवास्तव ने कहा, जो सामान भारत आ चुका है, उसे पुराने नियमों के अनुसार बाहर जाने दिया जाएगा। श्रीवास्तव के मुताबिक, भारत ने बांग्लादेश के सामान को अपने बाजार में बिना किसी टैरिफ के आने की अनुमति दी। सिर्फ शराब व सिगरेट को छोड़कर बाकी सभी सामान पर कोई टैक्स नहीं लगता।
