कैंसर के खिलाफ जंग का नया अध्याय शुरू हो गया है। कैंसर रोगी को सर्जरी और कीमोथैरेपी के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए अब वार सीधे रोग पैदा करने वाले प्रोटीन पर होगा। प्रोटीन को निष्क्रिय करके कैंसर रोका जाएगा। प्रोटीन की रासायनिक संरचना पहचानने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ली जा रही है। इंडो-यूएस कैंसर डायलॉग प्रोजेक्ट के तहत इन दवाओं का ट्रायल एम्स दिल्ली में भी होगा।
जेम्सकॉन-2025 में आए केसवेस्टर्न यूनिवर्सिटी, क्लीवलैंड अमेरिका के पूर्व प्रोफेसर डॉ. नीलेश शर्मा ने यह बात बताई। वह इंडो-यूएस कैंसर डायलॉग प्रोजेक्ट के सदस्य हैं और कैंसर की नई दवाओं की खोज कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की पहल पर वर्ष 2023 में शुरू हुआ। बाइडन के बेटे को मस्तिष्क का कैंसर है। डॉ. शर्मा ने बताया बताया कि जीन के सिग्नल पर प्रोटीन कैंसर पैदा करते हैं। ऐसी दवाएं खोजी गई हैं जो उस प्रोटीन को निष्क्रिय कर देंगी। इससे कैंसर वहीं रुककर बेअसर हो जाएगा।
नीलेश ने बताया कि नई दवाएं कारगर हैं। अमेरिका में इनका क्लीनिकल ट्रायल हुआ है लेकिन अभी बहुत महंगी हैं। बाद में सस्ती होंगी। ये कीमाथैिरेपी को रिप्लेस कर देगी। देश में इन दवाओं के क्लीनिकल ट्रायल की शुरुआत एम्स दिल्ली में की जा रही है। इस संबंध में उन्होंने एम्स प्रबंधन से बात कर ली है। उन्होंने बताया कि जीन के सिगनल पर एक्टिव होने वाले प्रोटीन की रासायनिक संरचना एआई पता करता हैं। उसी आधार पर दवा तैयार कर प्रोटीन को बेअसर किया जाता है। इस समय वह फेफड़ों और इसकी झिल्ली के कैंसर की दवा तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा रोगों के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाएं भी तैयार की गई हैं। इसके कैंसर का शरीर पर अधिक दुष्प्रभाव नहीं हो पाएगा।
जीन पैदा करते हैं कैंसर : जीन कैंसर पैदा करते हैं। जीन म्यूटेशन होने में प्रोटीन सक्रिय हो जाता है। इससे कोशिकाओं का डिवीजन पर रोक खत्म हो जाती है और मल्टीप्लाई होती रहती हैं। फेफड़ों के कैंसर के लिए ईजीएफआरजी जीन जिम्मेदार होता है। इसी तरह अन्य जीन अलग कैंसर करते हैं। जीन का अस्त्र प्रोटीन होता है, उसे बेअसर करने से कैंसर पर काबू आ जाता है।
