प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिविल सेवकों को नागरिक देवो भव का नया मंत्र देते हुए कहा कि नौकरशाही पुराने ढर्रे पर काम नहीं कर सकती। इसलिए सरकार अगले एक हजार साल की रूपरेखा तैयार करने के लिए नीतियां बना रही है। ये नीतियां हमारे भविष्य को आकार देंगी और सभी को इस साझा दृष्टिकोण के लिए अथक प्रयास करने होंगे। प्रधानमंत्री सोमवार को विज्ञान भवन में सिविल सेवा दिवस पर एक समारोह को संबोधित कर रहे थे।
पीएम मोदी ने कहा, पहले नौकरशाही की भूमिका औद्योगीकरण और उद्यमशीलता की गति को नियंत्रित करने वाले नियामक के रूप में होती थी। अब राष्ट्र इस मानसिकता से आगे बढ़ चुका है और ऐसा माहौल बना रहा है जो नागरिकों के बीच उद्यम को बढ़ावा देता है और उन्हें बाधाओं को दूर करने में मदद करता है। सिविल सेवाओं को एक सक्षमकर्ता के रूप में बदलना चाहिए, अपनी भूमिका को केवल नियम पुस्तिकाओं के रखवाले से बढ़ाकर विकास का सूत्रधार बनना चाहिए।
नौकरशाहों के साथ करीब 40 मिनट की बातचीत में पीएम मोदी ने भारतीय समाज, युवाओं, किसानों और महिलाओं की आकांक्षाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इनके सपने अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंच गए हैं। इन असाधारण आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए असाधारण गति की आवश्यकता होगी।
