तकरीबन पांच माह से आतंक का पर्याय बना तेंदुआ बृहस्पतिवार की सुबह छिबैयां गांव के एक घर में घुस गया। घर के लोगों ने किसी तरह जान बचाते हुए उसे एक कमरे में बंद कर दिया। करीब दस घंटे बाद उसे बेहोश कर पकड़ा जा सका। इससे पहले रास्ते में उसने दो लोगों पर हमला किया, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गांव में दहशत का माहौल रहा।
तेंदुआ तालाब के रास्ते गली से होते हुए – पहुंचा और रतन सिंह के मकान का दरवाजा खुला देख अंदर घुस गया। रतन सिंह की पत्नी संगीता सिंह ने दरवाजा बंद करने प्रयास किया तो उन पर झपटा तो किसी तरह उन्होंने अपनी जान बचाई। संगीता के शोर मचाने पर घर के अन्य सदस्य भागकर दूसरे कमरे चले गए। जिस कमरे में तेंदुआ था, उसे बाहर से बंद कर दिया गया।
इधर, बड़ी संख्या में ग्रामीण और पुलिस पहुंच गई। कमरे में सिटकनी नहीं लगी थी। उसे लकड़ी की बल्ली और पत्थर लगाकर बंद किया गया। कुछ देर बाद वन विभाग और पीएसी मौके पर पहुंची। मकान को घेरकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। कमरे के एक छोर पर लोहे का पिंजड़ा और दरवाजे के सामने जाल लगाया गया।
शाम करीब छह बजे कानपुर से आई वन विभाग की टीम ने तेंदुआ को बेहोश कर बाहर निकाला। फूलपुर के वन क्षेत्राधिकारी लक्ष्मीकांत दुबे ने बताया कि अभी तेंदुए को मिंटो पार्क लाया गया है। बाद में तंय किया जाएगा कि उसे कहां पर ले जाना है।
जबड़े में दबोच लिया हाथ …….सुबह तकरीबन साढ़े आठ बजे के आसपास छिबैयां गांव के मनोज भारतीय (35) पुत्र रामराज तालाब के किनारे से अपने पुराने घर की ओर जा रहे थे। अचानक पीछे से तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया, जिससे उनके सिर और बाएं कंधे पर गहरा घाव हो गया। वहीं से गुजर रहे सूर्य प्रताप (25) पुत्र राजकुमार समझ पाते कि उन पर भी हमला कर कुछ दाहिने हाथ को जबड़े में दबोच लिया। किसी तरह सूर्य प्रताप ने अपना हाथ छुड़ाया और बदहवास होकर भागे।
