बाबा विश्वनाथ की नगरी में कण-कण शंकर का भाव बुधवार को साकार हुआ। गंगा घाट, गलियां और सड़कों पर शिव के गणों का जयघोष गूंजता रहा। महाशिवरात्रि पर सात अखाड़ों के 10 हजार से ज्यादा नागा साधु, संन्यासी और संतों ने अपने आराध्य को त्रिवेणी का पुण्य अर्पित किया।
अखाड़ों की पेशवाई यानी राजसी यात्रा में साधु-संन्यासियों की भीड़ इतनी थी कि तीन किलोमीटर लंबी कतार लग गई। पेशवाई के साथ ही दर्शन-पूजन की प्रक्रिया करीब पांच घंटे तक चली। राज्य सरकार की तरफ से हेलिकॉप्टर के जरिये साधु-संन्यासियों के साथ ही कतारबद्ध श्रद्धालुओं पर फूल बरसाए गए।
शस्त्र और शास्त्र से महादेव के चरणों में श्रद्धा का भाव अर्पित किया। इसके साथ ही महाकुंभ की यात्रा भी पूर्ण हो गई। यह पहला मौका था, जब अखाड़ों ने गेट नंबर चार से धाम में प्रवेश किया। श्री शंभू पंचदशनाम जूना अखाड़े की पेशवाई बुधवार की सुबह 6 बजे गोदौलिया चौराहे पर पहुंची।
12 रथ और बग्घी के साथ नागा संन्यासियों की पेशवाई हनुमान घाट से निकली, जहां सड़क के दोनों तरफ बैरिकेडिंग की गई थी। इसकी अगुवाई आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज ने की।
