देहरादून/शिमला। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में फिर कुदरत का कहर बरपा है। बादल फटने और भारी बारिश से 22 लोगों की मौत हो गई और 15 लापता हैं। उत्तराखंड में 17 और हिमाचल में पांच लोगों की जान चली गई। कई लोग घायल हैं। उत्तराखंड में 2 शव पुराने भी मिले हैं। दोनों राज्यों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन और बाढ़ से सरकारी और निजी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। 13 पुल बह गए और सड़कें टूट गई हैं। कई मकान, दुकान और मंदिर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं।
राहत और बचाव कार्य में जुटी एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस व प्रशासन की टीमों ने विभिन्न इलाकों में फंसे 1,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला है। इनमें देहरादून के देवभूमि संस्थान परिसर में फंसे 200 विद्यार्थी भी शामिल हैं। उत्तराखंड में देहरादून और नजदीकी इलाकों में सोमवार शाम से हो रही मूसलाधार बारिश से बिगड़े हालात के बीच देररात करीब एक बजे सहस्रधारा क्षेत्र में बादल फटने से तबाही मच गई। इससे रिस्पना, आसन और तमसा नदियों में बाढ़ आ गई। सहस्रधारा में कई दुकानें और घरों के साथ चार लोग बह गए। तीन के शव मिल गए हैं। झाझरा में खननमें लगे 15 मजदूर ट्रैक्टर समेत बह गए। इनमें से आठ के शव मिल गए हैं। मालदेवता से ऊपर फुलेट में मकान गिरने से 8 लोग दब गए। इनमें दो के शव निकाल लिए गए हैं। देहरादून के बीचोंबीच डालनवाला से बहने वाली रिस्पना नदी में उफान से मोहिनी रोडपर बना पुल क्षतिग्रस्त हो गया। प्रेमनगर नंदा की चौकी के पास पुल टूट गया। तमसा नदी में बाढ़ से टपकेश्वर मंदिर में पीतल की बड़ी प्रतिमा बह गई। मंदिर के गर्भगृह तक पानी पहुंच गया। मंदिर परिसर में बना पुल भी तेज बहाव में टूट गया। जामुनवाला मेंएकादश मुखी हनुमान मंदिर भी आधे से ज्यादा बह गया। नैनीताल में भी सड़क पर मलबा गिरने से यातायात बंद हो गया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के आपदा प्रभावित इलाकों का दौरा कर हालात का जायजा लिया।
