माघ मेले में सोमवार को सुबह 11 बजे आरती और गंगा पूजन के बाद पांच दिवसीय पंचकोसी परिक्रमा का शुभारंभ हगा। श्री दत्तात्रेय सेवा समिति के तत्वावधान में साधु-संतों के साथ मेला प्राधिकरण के अधिकारी संगम तट पर पूजन करेंगे। संगम पूजन और आरती के बाद साधु-संत किला स्थित अक्षयवट, बड़े हनुमानजी के मंदिर, बांध स्थित दत्तात्रेय मंदिर से मौज गिरि मंदिर तक जाएंगे ।
अखाड़ा परिषद के महामंत्री महत स्वामी हरि गिरि के मुताबिक परिक्रमा के पहले दिन का यही रूट चार्ट है। सनातन धर्म के मुताबिक समुद्र मंथन के बाद जिन स्थानों पर अमृत की बूंदें गिरी वहां कुंभ मेला आयोजित किया जाता है। संत-महात्माओं के मुताबिक प्रयागराज में ही ब्रह्मा जी ने पृथ्वी का पहला यज्ञ किया था। मान्यता है कि माघ मास में यहां सभी 33 करोड़ देवी-देवता वास करते हैं जिससे यह तीर्थराज प्रयाग बना। यहीं माघ प्रवास के दौरान साधु-संत पंचकोसी परिक्रमा कर लोक कल्याण की कामना करते हैं ।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महमंत्री महंत स्वामी हरि गिरि के मुताबिक माघ मास में पंचकोसी परिक्रमा का विशेष महत्व है। कुंभ हो या माघ मेला यहां आए साधु-संत पंचकोसी परिक्रमा के दौरान प्रमुख तीर्थों (मंदिर-धाम) में जाकर दर्शन-पूजन करते हैं। इससे सनातनी परंपरा से नई पीढ़ी को जोड़ने में भी मदद मिलती है।
हरि गिरि महाराज ने बताया कि वैसे तो यह परिक्रमा मकर संक्रांति के बाद होती है लेकिन इस बार मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या पर्व के बीच अंतराल कम है। दोनों पों पर अधिक भीड़ का अनुमान है इसलिए इस बार पांच जनवरी सोमवार से परिक्रमा आरंभ होगा ।
पांच दिवसीय परिक्रमा के पहले दिन पांच जनवरी को अक्षयवट, लेटे हुए हनुमान जी, दत्तात्रेय मंदिर (जूना अखाड़ा), सरस्वती कूप, रामघाट, मौज गिरि समाधि, सिद्धपीठ मां ललिता देवी, मां कल्याणी देवी और वनखण्डी महादेव आदि के दर्शत्त किए जाएंगे। दूसरे दिन छह जनवरी को अरैल क्षेत्र स्थित शूलटंकेश्वर महादेव, आदि माधव, चक्र माधव, सोमेश्वर महादेव, छिवकी के गदा माधवे और ग्राम महेवा स्थित भैरव बाबा के व दर्शन किए जाएंगे। तीसरे दिन सात जनवरी को लालापुर के मनकामेश्वर महादेव, बीकर के पद्म माधव, देवरिया के सुजावन देव मंदिर, पनासा के पराशर ऋषि आश्रम, वाल्मीकि आश्रम व ज्वाला देवी के दर्शन किए जाएंगे। आठ जनवरी को शंख माधव, ककरा दुबावल स्थित दुर्वासा ऋषि आश्रम, रामपुर के संकट हरण हनुमान, पाण्डेश्वर महादेव, सीताकुंड, निषादराज स्थली, नागवासुकि, वेणी माधव और अलोप शंकरी माता के दर्शन किए जाएंगे। नौ जनवरी को संगम स्नान के बाद जूना अखाड़ा स्थित श्री राम जानकी मंदिर समेत अन्य तीर्थों का दर्शन किया जाएगा। अंत में विशाल भंडारे का आयोजन होगा। जूना अखाड़े के महामंत्री हरि गिरि महाराज ने मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, एडिशनल पुलिस कमिश्नर, मेला अधिकारी, मेला पुलिस अधिकारी समेत अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से भेंट कर उन्हें परिक्रमा में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
