माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर पर अनधिकृत और महंगी पाठ्य पुस्तकों पर पूरी तरह रोक लगा दी है। परिषद ने साफ चेतावनी दी है कि यदि किसी विद्यालय द्वारा छात्रों को अनधिकृत या अधिक मूल्य वाली पुस्तकों को खरीदने अथवा पढ़ने के लिए बाध्य किया गया तो उस संस्था पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही मान्यता निलंबन या पूरी तरह समाप्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है
माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा कक्षा नौ से 12 तक कुल 34 विषयों के अंतर्गत 70 एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकों को सस्ते दर पर प्रचलन में लाया गया था। इन पुस्तकों के मुद्रण और वितरण के लिए परिषद ने तीन मुद्रक-वितरकों को अधिकृत किया है।
परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि हाईस्कूल स्तर पर अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान एवं इंटरमीडिएट स्तर पर अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, व्यवसाय अध्ययन, लेखाशास्त्र, मनोविज्ञान, गृह विज्ञान सहित कुल 36 विषयों की 70 एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकें प्रदेश के सभी राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्त विहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों के लिए अनिवार्य की गई है।
इसके अलावा परिषद द्वारा विकसित कक्षा नौ से 12 तक हिंदी, संस्कृत और उर्दू विषयों की 12 पाठ्य पुस्तकों को भी सस्ते दर पर छात्रों के अध्ययन हेतु लागू किया गया है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सभी राजकीय, सहायता प्राप्त और स्ववित्त पोषित हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट विद्यालयों में केवल माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा अधिकृत प्रकाशकों से मुद्रित पाठ्य पुस्तकों को पढ़ाया जाएगा। इसके अलावा किसी अन्य पाठ्य पुस्तक को प्रचलन में लाने की अनुमति नहीं होगी।
सचिव भगवती सिंह ने कहा कि निर्देशों का उल्लंघन इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के तहत गंभीर अपराध माना जाएगा। दोषी पाए जाने पर संस्था पर पांच लाख रुपये का जुर्माना, निर्धारित अवधि के लिए मान्यता निलंबन अथवा पूरी तरह से समाप्त की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाठ्य पुस्तकों की डुप्लीकेसी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए तीन वितरकों को अधिकृत किया गया है। इनमें आगरा, झांसी और लखनऊ के वितरक शामिल हैं।
