लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी पसंद का जनप्रतिनिधि चुनना जनता का अधिकार है लेकिन बार-बार चुनाव जनता पर बोझ है। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव से न केवल राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है बल्कि विकास बाधित होता है। इससे भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिलता है। राजनीतिक अस्थिरता से देश को संप्रभुता संपन्न और विकसित राष्ट्र नहीं बनाया जा सकता। देश में राजनीतिक स्थिरता और विकास एक राष्ट्र-एक चुनाव से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि विधानसभाओं के कार्यकाल को समायोजित कर एक साथ चुनाव कराए जाएं ताकि 3.5 से 4.5 लाख करोड़ रुपये के सालाना खर्च को कार्यों में लगाया जा सके। सीएम राजधानी के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सोमवार को एक राष्ट्र-एक चुनाव अभियान के अंतर्गत सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं के राज्य स्तरीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ विजन को साकार करने की आवश्यकता है, जो 2019 में लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा अनावरण के दौरान घोषित हुआ था। उन्होंने कहा कि यह विचार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई का भी था।
सीएम ने कहा कि 1952 से 1967 तक लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ हुए, लेकिन कांग्रेस की अंदरूनी टूट के बाद ये प्रथा खत्म हो गई। 1967 के बाद सरकारें भंग की गईं, राष्ट्रपति शासन लगा और राजनीतिक अस्थिरता ने देश को भटकाया। 1980 के दशक में भी यह मुद्दा उठा था। अब पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में बनी समिति की सिफारिशों और जनजागरण के जरिए इसे 2034 तक लागू करने का रोड मैप तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने लोगों से ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ के समर्थन में जनजागरण की अपील की। कहा कि विपक्ष दुष्प्रचार करेगा, लेकिन हमें जवाब देना चाहिए कि ‘देश हमारा है, विकास हमारा है, राजनीतिक स्थिरता हमारी जरूरत है।
