Homeदेशहरफान मौला वीरेंद्र कुमार की खानम आर्ट गैलरी में लगी प्रदर्शनी Clone

हरफान मौला वीरेंद्र कुमार की खानम आर्ट गैलरी में लगी प्रदर्शनी Clone

कला एवं साहित्य की नगरी प्रयागराज में अपने गांव की मीट्टी और उसकी खुशबू, नदी, पानी, झोपड़ी, पेड के साथ वहां की लोककला भी अपने साथ समेटे हुए हैं ये हरफनमौला कलाकार वीरेंद्र कुमार की एकल चित्रकला प्रदर्शनी तीर्थ राज प्रयागराज की खानम आर्ट गैलरी में चल रही है । माननीय मुख्य अतिथि – न्यायमूर्ति श्री सुधीर नारायण अग्रवाल और विशिष्ट अतिथि – ब्रिगेडियर श्री सैयद अहमद अली एसएम ने शुक्रवार 13 अक्टूबर 2023 को शाम 5:00 बजे प्रदर्शनी का उद्घाटन किया प्रदर्शनी  रविवार 15 अक्टूबर 2023 तक जारी रहेगी, प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक प्रदर्शनी का संचालन खानम आर्ट गैलरी की डाइरेक्टर डॉ. जाहेदा खानम द्वारा किया जाएगा। “टाइम्स एंड स्पेस” वीरेंद्र कुमार की पेंटिंग्स की एक एकल प्रदर्शनी हैI खानम आर्ट गैलरी, तीर्थराज प्रयागराज की एकमात्र निजी आर्ट गैलरी है ये कला और कलाकारों को अच्छा मंच प्रदान कर रही हैI खानम आर्ट गैलरी,
सी-859, जी.टी.बी. नगर, करेली, (पुराने थाने के पास) प्रयागराज में स्थिति है I सु मधुर विचार और स्वच्छ दिल के वीरेंद्र कुमार रातदिन चित्र और विचित्र रंगों, आकारो को सोते जागते ….गाने गुनगुनाते अपने हाथो से बने बडे चाकू, स्कँपचुला से कई माध्यम के मिश्र रंगो से चित्र रंगते हैं। केनवास को जमीन पर रख, परिक्रमा करते हुए उसे रंगते जाते है। इस अजब तरीके से उस समय कलाकार के दिमाग में जो शहर, गली, गांव, घर, खेत खलिहान घूम रहा होता है, जस का तस केनवास पर उतरता चला जाता है। चित्र की खडी लकीरें कलाकार की आसमाँ छूने की ललक की द्योतक है। लयात्मक रंगारंग चित्र तैयार करना ही इस कलाकार की खुबसूरती है।
कलाकार भी सामाजिक सरोकार से जुड़ा होता है। आज का पर्यावरण का ज्वलंत विषय भी इनके केनवास पर चित्रित दिखाई पड़ता है। कला और कलाकार, विशेषतः युवा कलाकारों के लिए विशेष योगदान स्वरूप ये
“हिमालय की गोद में” नामक वर्कशॉप्स और राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वर्कशॉप्स लगा चुके है। इस उद्देश्य के साथ की कला की तकनीक और ज्ञान का आदान प्रदान हो । गांव की मिट्टी से मुर्ती बनाते – बनाते चित्र बनाने लगे तब इनके एक शिक्षक की पैनी नजर ने उन्हे चित्रकला की शिक्षा के दरवाजे तक पहुंचाया। मगध युनिवर्सीटी से जाँग्रोफी ऑनर्स और आर्ट एण्ड क्राफ्ट कॉलेज पटना युनिवर्सीटी से बैचलर ऑफ फाईन आर्टस करने के बाद, इस तरह टेडे – मेडे रास्ते से निकल कर वे सीधे दिल्ली पहुंचे।
वहां की ऊंची ऊंची ईमारते और रात की जगमगाहट के ग्लैमर का आकर्षण……..इस फाकाराम कलाकार के मन के केनवास को बड़ा बनाता रहा। अपने संघर्ष, लगन और ईमानदारी से अंततः कलाजगत मे अपनी पहचान बनाने का इनका प्रयास सफल रहा। अब कला, कलाकारों से परीचय हो ने लगा औरे इस परिचय ने एक ग्रुप का आकार लिया। यहाँ से ग्रुप शोस की शुरुआत हुई।
। इसी फाकामस्ती के समय इनको मौरिशस जाने का मौका मिला तब अपनी मेहनत से प्रोजेक्ट, पोट्रेट आदि के द्वारा पैसे की व्यवस्था जुटा ये मौरिशस
पहुंचे। उद्घाटन के लिए वहां के प्रधानमंत्री उपस्थित थे, तब उनका स्केच बनाया, जो उस ट्रीप का यादगार लम्हा रहा।
कलाकार ने अपने स्व कमाई से अब तक पांच देशों की कलायात्रा की। कई महत्वपूर्ण गैलरीज ने इनकी चित्र प्रदर्शनीया आयोजित की। मुम्बई, सापुतारा (गुजरात) अहमदाबाद, बडोदा, पणजी (गोवा)
कलकत्ता, हैद्राबाद, पूणे, आसाम, भूवनेश्वर, बंगलौर और बहुत छोटे बड़े शहरों में कही कही दो – दो तीन – तीन बार तक चित्र प्रदर्शित कीए। भारत भवन, आय. सी. आय. गॅलरीज ने उनकी चित्र प्रदर्शनीया लगाई।
विदेशों की लिस्ट भी लंबी है। बैंकॉक, थायलॅण्ड, यू.ए.ई.. काठमांडू (नेपाल) मयनमार, इंडोनेशिया, लंदन, युगांडा, कुछ देश गिना रही हूं, जहां कलाकार अपनी कला के साथ यात्रा कर आए है।
देश की कला में एक आयाम जोडने की लालसा रखने वाले ‘वीरेन्द्र कुमार ‘अभी आगे लंबी उड़ान भरने को तैयार है। सतत् कला चिंतन और कला, कलाकार के लिए चिंतन करते कलाकार ने
अपनी कला को वे यूं बयां करते हैं, वीरेंद्र कुमार बताते हैं कि “मैं अपने चित्रों में अपने जीवन के संघर्ष और समय के साथ-साथ युग में बदलाव को दर्शाने की भरपूर कोशिश करता हूं” |
गाव से शहर तक का सफर इनके कल्पना का हिस्सा होते है, जिसमे सब स्पष्ट भी है और वेग भी है। मूर्त अमूर्त का नर्तन भी है।
बचपन में माँ, मौसी, चाची के हाथों त्योहारो पर बनते चित्र देख, हाथ से टुकड़े टुकड़े जोड बने बच्चे के बिछौने पर की गई कतरनों को चप्पका कर (एप्लीक) आकारो का सौदर्य हो या चद्दर पर चित्रकारी कर बिखरा सौदर्य सब बाल मन को आकर्षित करता रहा और
कोमल मन उसे अंजाने आत्मसात करता रहा। ये सब ही कला के मूल मे बसा है जो आज इस कलाकार की कला को निखार रहा है। आज उस विस्तार को हम ” कलाकार वीरेन्द्र कुमार ” के नाम से जानते है।
इस जागरूक कलाकार की 25 एकल प्रदर्शनीया और 112 ग्रुप शो हो चुके है।राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 25आर्ट कॅम्पस् इनके नाम है। इन्हें कई कला संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत किया जा चुका हैं| देश – विदेश में इनके चित्रों के कई प्राइवेट और सरकारी संग्रह भी है।
प्रयागराज के खानम आर्ट गैलरी में “टाइम एंड सपेस” शीर्षक एकल कला प्रदर्शनी में वीरेन्द्र कुमार अपने तरोताजा काम के साथ दिखाई दिए

नीतेशसोनी ब्यूरो प्रयागराज

 

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