जिले के तीन ब्लॉकों के 11 गांवों में 43 बच्चे व युवा ऐसे मिले हैं, जिन्हें बुखार के बाद झटका आया और फिर दिव्यांगता के शिकार हो गए।
इस बीमारी के कारण पीड़ित मानसिक रूप से कमजोर हो गए। मां-बाप इनको चेन व रस्सी से बांध कर रखते हैं। पीड़ितों में 14 माह के बच्चे से लेकर 22 साल तक के युवा हैं। प्रभावित छह गांव करीब 5 किमी के दायरे में स्थित हैं। डीएम के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में कैंप लगाकर बीमारों की जांच की।
साथ ही, सीएमओ ने जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी है। इधर, बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. विजयनाथ मिश्रा का कहना है कि बीमारी का अध्ययन करने के लिए एक टीम जाएगी, जो कारणों का पता लगाएगी। समाजसेवी सिद्धार्थ राय ने करीब तीन माह पूर्व एक मुट्ठी अनाज मांगने का अभियान शुरू किया था, इसी दौरान इस बीमारी का पता चला था।
उन्होंने बताया कि सदर, देवकली और मनिहारी ब्लॉक में पहुंचे तो बच्चों की यह दशा देख आंखें भर आईं। शहर से करीब पांच से छह किमी दूर स्थित फत्तेहउल्लाहपुर के बहादीपुर में 4 बच्चे, मनिहार ब्लॉक के हरिहरपुर में 4, हाला गांव में 6, देवकली ब्लॉक के शिकारपुर में 8, धारीकला में 4, हाला गांव के बनवारी राम, गोविंद राम, अजय, हरिलाल, राजनाथ, सोनू, जनार्दन यादव, अमरनाथ, हरिहरपुर के चौथीराम, शिवशरण, राजू चौहान, बहादीपुर के सुनील बिंद ने बताया कि यह स्थिति करीब तीन माह से है। पहले बुखार आता है, इसके बाद शरीर में झटका लगता है और अकड़न के साथ बच्चे दिव्यांग हो जा रहे हैं। कई बच्चों का पीजीआई तक उपचार कराया गया। इसके बावजूद कोई फायदा नहीं हुआ।
