लंदन/नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन ने कारोबारी रिश्तों में नया इतिहास लिखते हुए बृहस्पतिवार को मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। इससे दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार में 34 अरब डॉलर यानी 2.92 लाख करोड़ रुपये तक की वृद्धि होगी।
भारत ही नहीं, यूरोपीय यूनियन से अलग होने के बाद ब्रिटेन के लिए भी यह अब तक का सबसे महत्वपूर्ण व्यापार समझौता है। इससे दोनों देशों के उत्पाद एक-दूसरे के यहां सस्ते और प्रतिस्पर्धी बनेंगे। भारत से ब्रिटेन जाने वाले वस्त्र, जेनरिक दवाएं व चिकित्सा उपकरण, चमड़े के सामान और कृषि एवं रासायनिक उत्पाद प्रमुख रूप से इसमें शामिल हैं। वहीं, ब्रिटेन से आने वाली व्हिस्की, कारों समेत कई अन्य वस्तुओं पर टैरिफ में कटौती होगी।
समझौते को आधिकारिक तौर पर व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) नाम दिया गया है। लंदन के ग्रेट हॉल ऑफ चेक र्स में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों नरेंद्र मोदी और कीर स्टार्मर की उपस्थिति में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। अब ब्रिटेन को किए जाने वाले 99 फीसदी भारतीय निर्यात पर शुल्क समाप्त हो जाएगा। यह छूट दोनों देशों के लगभग पूरे व्यापारिक मूल्य को कवर करती है। यानी दोनों देशों के बीच व्यापार का लगभग पूरा हिस्सा अब कर मुक्त होगा।
समझौते पर हस्ताक्षर के बाद पीएम मोदी ने कहा, यह व्यापार बढ़ाने,समावेशी विकास को गति देने और किसानों, महिलाओं, युवाओं, एमएसएमई एवं पेशेवरों के लिए अवसर पैदा करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ब्रिटिश पीएम स्टार्मर ने कहा, इससे हजारों नौकरियां पैदा होंगी और विकास को गति मिलेगी। अब करार को ब्रिटिश संसद की पुष्टि की जरूरत होगी। दोनों देशों में अलग से द्विपक्षीय निवेश संधि पर अभी बातचीत चल रही है। इससे ब्रिटिश कंपनियों के लिए भारत को व्हिस्की, कार और अन्य उत्पादों का निर्यात आसान हो जाएगा। यह करार ऐसे समय हुआ है जब भारत यूरोपीय संघ व अमेरिका सहित प्रमुख साझेदारों से बात कर रहा है। अनुमान है, दोनों देशों में 2040 तक सालाना कारोबार 39 फीसदी बढ़ जाएगा। पीएम मोदी देर रात ब्रिटेन से मालदीव रवाना हो गए।
