काठमांडो। नेपाल में तख्तापलट के तीन दिन बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की अंतरिम प्रधानमंत्री बन गई हैं। संसद भंग करने के साथ छह महीने में उन्हें संसद यानी प्रतिनिधि सभा के चुनाव की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने अपने पहले फैसले में पांच मार्च, 2026 को आम चुनाव का एलान कर दिया। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उनकी सिफारिश मंजूर कर ली।
इससे पहले, राष्ट्रपति पौडेल ने जेन-जी की सभी मांगें मानने का एलान किया और शुक्रवार रात नौ बजे कार्की को शपथ भी दिला दी। कार्की के नाम पर बृहस्पतिवार देर रात एक बजे ही सहमति बन गई थी। अलबत्ता संसद भंग करने पर एकराय नहीं बन पा रही थी। जेन-जी संसद भंग करने पर अड़े हुए थे। राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में शुक्रवार को दोपहर दो बजे से शाम साढ़े सात बजे तक चली उच्चस्तरीय बैठक के बाद संसद भंग करने और कार्की को शपथ दिलाने का एलान किया गया। कार्की देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीशरही हैं और अब पहली महिला प्रधानमंत्री बनकर उन्होंने इतिहास रच दिया।
इससे पहले, राजनीतिक गतिरोध खत्म करने के लिए राष्ट्रपति पौडेल एवं सेना प्रमुख अशोकराज सिगडेल के नेतृत्व में हितधारकों के बीच बैठकों के कई दौर हुए। इनमें वर्तमानमुख्य न्यायाधीश प्रकाश मानसिंह राउत और आंदोलनकारी जेन-जी के प्रतिनिधि शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक, सेना प्रमुख सिगडेल ने राष्ट्रपति को आपातकाल लगाने की सलाह दी है। माना जा रहा है कि कैबिनेट की पहली बैठक में इस पर निर्णय हो सकताहै। राष्ट्रपति ने जेन-जी के प्रतिनिधियों के समक्ष संविधान के अनुच्छेद 61(4) का उपयोग करते हुए कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री एवं नई कैबिनेट बनाने और चुनावों की घोषणा का प्रस्ताव रखा। राष्ट्रपति ने एक ही पत्र से संसद केनिचले सदन प्रतिनिधि सभा को भंग करने और नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति की घोषणा की, जो नेपाल की राजनीति में अभूतपूर्व घटना है। शपथ के बाद कार्की ने सभी मंत्रालय अभी अपने पास रखे हैं। शनिवार को कैबिनेट विस्तार होने की उम्मीद है।
