भारत के लिए वर्ष 2025 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रगति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ । कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सेमीकंडक्टर से लेकर अंतरिक्ष अनुसंधान, परमाणु ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों तक के मामले में भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा। साथ ही, यह भी दिखाया है कि वह अब वैश्विक तकनीकों को सिर्फ अपना नहीं रहा, बल्कि उन्हें आकार भी दे रहा है।
तकनीकी क्षेत्र में भारत की यह प्रगति विकसित भारत 2047 विजन के साथ मजबूती से जुड़ी है। देश में पहली बार किसी सरकार ने सेमीकंडक्टर विनिर्माण को तकनीकी मिशन का मुख्य हिस्सा बनाया है। मई 2025 में नोएडा और बंगलुरू में 3-नैनोमीटरआकार की चिप के डिजाइन के लिए समर्पित दो उन्नत इकाइयों का शुभारंभ करके एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया। ये इकाइयां भारत की उस यात्रा की शुरुआत का प्रतीक हैं, जिसमें देश सेमीकंडक्टर से जुड़ी अपनी जरूरत के 90 फीसदी हिस्से का आयात करने से लेकर अब रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण इस क्षेत्र में अपना भविष्य खुद तय करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इंडिया एआई मिशन के तहत भारत को अग्रणी बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का महत्वपूर्ण निवेश किया है।
सूत्रों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारत ने एआई से जुड़े राष्ट्रीय बुनियादी ढांच के व्यापक विस्तार की तैयारी की है। इसके तहत 15,916 नए जीपीयू जोड़े गए। भारत की राष्ट्रीय कंप्यूट क्षमता अब 38,000 जीपीयू से अधिक हो गई है। ये जीपीयू 67 रुपये प्रति घंटे की सब्सिडी वाली दरों पर उपलब्ध हैं, जो 115 रुपये प्रति जीपीयू घंटे की औसत बाजार दर से कम है।
उन्नत देशों के बीच बनाई जगह : भारत ने हाल ही में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के 2025 ग्लोबल एआई वाइब्रेसी टूल में तीसरे स्थान पर पहुंचकर शानदार छलांग लगाई है। वह एआई से जुड़ी प्रतिस्पर्धा में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर रहा और इस तरह दक्षिण कोरिया, यूके, सिंगापुर, जापान, कनाडा, जर्मनी और फ्रांस जैसी उन्नत अर्थव्यवस्थाओं से आगे निकल गया है।
