सुप्रीम कोर्ट बृहस्पतिवार को चुनाव में राजनीतिक पार्टियों के खर्च पर सीमा तय करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल तय की है।
यह याचिका गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) कॉमन कॉज और सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन की ओर से दायर की गई है। अधिवक्ता प्रशांत भूषण याचिकाकर्ताओं की ओर से शीर्ष अदालत में पेश हुए। याचिका में कहा गया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77(1) के तहत उम्मीदवारों के चुनाव खर्च पर सीमा तय है, लेकिन राजनीतिक दलों के खर्च पर कोई सीमा नहीं है। इससे चुनाव में बराबरी का मौका नहीं मिलता और यह संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
याचिका में धारा 77(1) की व्याख्या 1 (ए) को असांविधानिक घोषित करने की भी मांग की गई है। इसमें कहा गया कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं और चुनावी प्रक्रिया को धनबल और भ्रष्टाचार से मुक्त रखना जरूरी है।
