प्रयागराज। यमुना नदी का जलस्तर नीचे जाने के साथ शहर के एक चौथाई हिस्से में जल संकट गहराने की संभावना बन गई है। अफसरों की सुस्त चाल से यह समस्या और बढ़ती दिख रही है। स्थिति यह है कि इसके स्थायी समाधान के लिए फ्लोटिंग पंप लगाने की योजना बनाई गई है, लेकिन एक साल में विस्तृत प्रस्ताव तक तैयार नहीं हो सका है। नगर निगम क्षेत्र में रोजाना कुल 40.20 करोड़ लीटर पानी की आपूर्ति की जाती है। इसमें से करीब 10 करोड़ लीटर पानी यमुना नदी से लिया जाता है। इस तरह से शहर की एक चौथाई आबादी को यमुना नदी से जलापूर्ति की जाती है। करेला बाग में लगे इंटेकवेल से यमुना नदी से पंप करके खुसरो बाग वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में पानी भेजा जाता है। यहां पर शोधन के बाद शहर में जलापूर्ति की जाती है, लेकिन अब नदी का जलस्तर नीचे जाने लगा है। इससे जल संकट गहराने की आशंका है। शहरियों को करीब हर साल इस समस्या से जूझना पड़ता है। ऐसे में इसके स्थायी समाधान के लिए फ्लोटिंग पंप लगाने का निर्णय लिया गया है। फ्लोटिंग पंप की खासियत यह होगी कि यमुना नदी के जलस्तर के साथ वह भी नीचे चला जाएगा और उसकी मदद से पानी पंप करके वेल को भरा जा सकेगा। इस पर पिछले वर्ष ही योजना बन गई थी और इसे लगाने की जिम्मेदारी जल निगम को दी गई है, लेकिन अब तक यह प्रस्ताव तक ही सीमित है। जल निगम की ओर से अबइसका विस्तृत प्रस्ताव (डीपीआर) तैयार किया जा रहा है। इसके बाद इसे शासन से मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। फिर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जल निगम के अधिशासी अभियंता सौरभ का कहना है कि इस वर्ष फ्लोटिंग पंप नहीं लग पाएगा। वहीं गर्मी बढ़ने के साथ यमुना नदी का जलस्तर नीचे जाने लगा है।
