व्यापार बाधाओं के बावजूद घरेलू आर्थिक एवं कारोबारी गतिविधियों में उछाल के दम पर जीएसटी संग्रह अप्रैल, 2025 में 2.37 लाख करोड़ रुपये के नए शिखर पर पहुंच गया। इस दौरान घरेलू लेनदेन से जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 10.7 फीसदी बढ़कर 1.9 लाख करोड़ और आयातित उत्पादों से कर राजस्व 20.8 फीसदी बढ़कर 46,913 करोड़ रुपये पहुंच गया।
सरकार के बृहस्पतिवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल, 2025 में 27,341 करोड़ का रिफंड जारी किया। यह एक साल पहले की तुलना में 48.3 फीसदी अधिक है। रिफंड समायोजन के बाद शुद्ध जीएसटी संग्रह 9.1 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 2.09 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।
डेलॉय इंडिया के पार्टनर एमएस मणि ने कहा, चालू वित्त वर्ष के पहले महीने में शुद्ध जीएसटी संग्रह का दो लाख करोड़ से अधिक रहना मार्च, 2025 में मजबूत आर्थिक गतिविधियों का संकेत देता है। खास बात है कि अप्रैल में जीएसटी संग्रह सभी प्रमुख उत्पादक/उपभोक्ता राज्यों में समान रूप से 11-16 फीसदी के बीच उच्च रहा है। मार्च में कुछ बड़े राज्यों में वृद्धि दर कम रही थी।
ईवाई में टैक्स पार्टनर सौरभ अग्रवाल ने कहा, रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह वैश्विक अनिश्चितताओं के सामने भारतीय अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित ताकत की रेखांकित करता है। इसमें सरकार की ओर से किए गए उपायों की भी बड़ी भूमिका है।
