नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संघ (आईएटीए) के महानिदेशक विली वॉल्श का कहना है कि लगातार बढ़ते खर्च और टैक्स संबंधी चुनौतियों में बढ़ोतरी के बावजूद उड़ान की वास्तविक लागत एक दशक पहले की तुलना में 40 फीसदी कम हो गई है। वहीं, दुनियाभर में हवाई यात्रियों की संख्या सालाना पांच अरब के पार पहुंचने की उम्मीद है।
वॉल्श ने 42 साल बाद भारत में हो रही आईएटीए की सालाना आम बैठक (एजीएम) में सोमवार को कहा, हवाई यातायात की मांग बढ़ने के बाद भी किराये को लेकर चिंता बनी हुई है। आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी समस्याओं के कारण विमानन उद्योग की वृद्धि दर धीमी हो गई है। विमानों के मामले में विनिर्माण क्षेत्र बुरी तरह विफल हो रहा है। 17,000 विमानों का बैकलॉग है। इसका मतलब है कि ऑर्डर देने और डिलीवरी के बीच 14 साल का इंतजार।
आईएटीए महानिदेशक ने कहा, 2025 के लिए निर्धारित डिलीवरी की संख्या एक साल पहले किए गए वादे से 26 फीसदी कम है। 1,100से अधिक विमान 10 साल से पड़े हुए हैं, जो पूरे बेड़े का 3.8 फीसदी है और कोरोना महामारी की तुलना में करीब तीन गुना हैं। बेड़े में विमानों को बदलने की दर तीन फीसदी है, जो सामान्य से पांच-छह फीसदी कम है।
इससे राजस्व पर असर पड़ता है,क्योंकि कुछ मांगें पूरी नहीं हो पाती हैं।रखरखाव और पट्टे की लागत भी बढ़ती रहती है। आईएटीए वैश्विक स्तर पर 350 से अधिक विमानन कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है।
