इस साल हुए महाकुंभ में तमाम परियोजनाओं को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों को काटा गया था. आकड़ों पर जाए तो 900 से अधिक पंडों को हटाकर रोड चौड़ीकरण के साथ शहर का सौदर्गीकरण किया गया था. जुलाई में फिर से एक बार पूरे जिले में लाखों पौधों का रोपण किया जा रहा है. ऐसे में फारेस्ट सर्वे आफ इंडिया की 2023 की रिपोर्ट को बरकरार रख पाना किसी चैलेंज से कम नहीं होगा. जिसमें प्रयागराज का वन क्षेत्र 166.23 वर्ग किमी दिखाया गया था. जो कि 2021 के सर्व के मुकाबले अधिक था. ऐसे में इस बढ़त को बनाकर फिर से हरियाली को सहेजना वन विभाग के लिए आसान नहीं होगा. दर्ज की गई थी बढ़ोतरी
2023 की रिपोर्ट के अनुसार प्रयागराज जिले में वन क्षेत्र बढ़कर 166.23 वर्ग किमी हो गया है, जो इससे पहले 161 29 वर्ग किमी था. कुल मिलाकर जिले में 4.94 वर्ग किमी की हरियाली जुड़ी थी. यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ओपन फरिस्ट श्रेणी में दर्ज की गई है, जिसका क्षेत्र फरत 89.62 से बढ़कर 94.56 वर्ग किमी हो गया है. मॉडरेट ड्रेस फॉरेस्ट यानी मध्यम घनता वाले जंगल अब भी 65.58 वर्ग किमी पर स्थिर थे. वहीं स्क्रब यात्री झाड़ीदार भूमि में भी थोड़ा सुधार देखा गया है, जो अब 8.08 वर्ग किया है. इन आंकड़ों ने नेशनल हो नही इंटरनेशनल लेवल पर भात की हरित विचारधारा को काफी सम्मान दिलाया था।प्रयागराज के अलावा पांच जिलों में वन क्षेत्र में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक सोनभद्र, मिर्जापुर, ललितपुर, चंदौली और प्रयागराज उन जिलों में शामिल हैं, जहां हरियाली में सबसे ज्यादा इजाफा हुआ या. सोनभद्र और मिर्जापुर पहले से ही अपने घने जंगलों के लिए पहचाने जाते हैं, लेकिन अब वहां की हरित पट्टी और सशक्त हुई है. चंदौली और ललितपुर में भी ग्रामीण इलाकों में बड़े स्तर पर पौधारोपण हुआ है. इस बार उन जिलों के लिए भी हरियाली को बरकरार रखना आसान नहीं होगा
