Homeसमाजआतंक का पर्याय विकास दूबे

आतंक का पर्याय विकास दूबे

एक ऐसा नाम जिसको सुनते ही लोगो के रोंगटे खड़े हो जाए, डीएसपी समेत आठ पुलिसकर्मियों का हत्यारा

कानपुर जिले के चौबेपुर थाना अंतर्गत बेकरु गांव में विकास दुबे का आशियाना था यूं तो उसके कई मकान और फ्लैट देश के अन्य शहरों और विदेशों में भी थे लेकिन उसने अपने अपराध के दुनिया का साम्राज्य बेकरु गांव से ही शुरू किया था उसके ऊपर पहला अपराधिक मामला 1990 में दर्ज हुआ उसके बाद से लगातार उसके उपर हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी, जमीन हड़पने जैसे 60 संगीन मामलों में उसके ऊपर केस न्यायालय में लंबित थे।


2000 में ताराचंद इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडे की हत्या में उसका नाम सामने आया उसी वर्ष रामबाबू यादव की हत्या में वो शामिल हुआ, इसके पश्चात 2001 में उसने थाने में घुसकर राजनाथ सिंह की सरकार में राज्यमंत्री रहे संतोष शुक्ला की हत्या कर दी और अदालत ने सबूत के अभाव में उसे बरी कर दिया उसके खौफ का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि थाने में घुस के हत्या करने के बाद भी उसके खिलाफ किसी ने अदालत में गवाही नही दी उसके बाद से तो उसके नाम का डंका बजने लगा।

राजनैतिक जीवन

विकास दूबे जरायम की दुनिया के साथ साथ राजनीति में भी सक्रिय रहा कभी सपा तो कभी बसपा का सदस्य रहा वो लगातार 3 पंचवर्षीय निर्विरोध प्रधान चुना जाता रहा उसके बाद उसने अपने पत्नी को जिला पंचायत का चुनाव लड़वाया और अपने बाहुबल के दम पर जीतवाया भी

रात का वो खौफनाक मंजर

3 जुलाई 2020 का दिन था रात के 12 बजे के बाद से ही पूरे जिले के पुलिस रेडियो स्टेशन पर पुलिस फोर्स को अलर्ट किया जा रहा था सभी पुलिस थाने के प्रभारी को अपने दल बल के साथ चौबेपुर पहुचने के लिए निर्देशित किया जा रहा था, सीओ देवेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस की एक टीम बेकरु गांव पहुँची उसके बाद जो हुआ वो दिल दहलाने वाला था आधीरात को जब पूरा गांव सो रहा था उसी समय गोलियों की गड़गड़ाहट से पूरा गांव सन्न हो गया चारो तरफ से पुलिसकर्मियों पर गोलियों की बौछार की जा रही थी

हमे बचा लो हमे बचा लो के आवाज गूंज रहे थे लेकिन उनकी पुकार सुनने वाला कोई नही था, जब तक बचाव के लिए दूसरी टीम आती तब तक सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो चुके थे साथ मे सात पुलिसकर्मी घायल भी हो गए थे।

पुलिस इनकाउंटर में विकास दूबे की मौत

आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद विकास दूबे फरार चल रहा है फिर अचानक से पता चला कि विकास दूबे ने मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के महाकालेश्वर मंदिर में आत्मसमर्पण कर दिया उसके बाद उत्तर प्रदेश की एसटीएफ टीम महाकालेश्वर से उसको लेकर कानपुर आ रही थी कानपुर हाइवे पर ही 10 जुलाई की सुबह लगभग 6 बजे पुलिस की गाड़ी पलटी और विकास दूबे पुलिस का हथियार छीनकर भागने की कोशिश की जिसमे उसका इनकाउंटर कर दिया गया


रिपार्ट-उमेश कुमार पाण्डेय

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