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अवैध खनन रोकने को डिजिटल निगरानी और संयुक्त छापेमारी, राज्यों में होगा समन्वय

गंगा समेत अन्य नदियों में हो रहे अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। अब उत्तर प्रदेश के साथ ही पड़ोसी राज्य भी मिलकर अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। इसके लिए सभी राज्यों ने संयुक्त निगरानी तंत्र तैयार किया है।

 

इस व्यवस्था के तहत खनन विभाग और प्रशासनिक अधिकारी संयुक्त रूप से प्रवर्तन की कार्रवाई करेंगे। साथ ही वैध ट्रांजिट पास के साथ अंतरराज्यीय परिवहन प्रपत्र (आईएसटीपी) को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। यूपी के खनन विभाग ने मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और झारखंड से इस अभियान में सहयोग मांगा है।

 

हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मुख्य सचिव एसपी गोयल की अलग-अलग समीक्षा बैठकों में अवैध खनन पर सख्ती के निर्देश दिए गए थे। इन्हीं निर्देशों के क्रम में भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही तकनीकी रूप से अधिक सख्त कार्ययोजना तैयार की है।

अधिकारियों के अनुसार इस योजना को पूरी सख्ती से लागू किया जाएगा। निगरानी तंत्र को और प्रभावी बनाने के लिए एक इंटीग्रेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित किया जाएगा, जिससे प्रत्येक कार्रवाई की ऑनलाइन मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी। इससे गंगा बेसिन सहित अन्य नदियों में रेत के अवैध खनन और बिक्री पर प्रभावी रोक लगेगी। यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

रियल टाइम डाटा के आधार पर होगा सूचनाओं का आदान-प्रदान…..  सीमावर्ती जिलों में स्थित सभी लोडिंग पॉइंट्स जैसे खनन पट्टे, खनिज भंडारण स्थल और क्रशर पर वाहन लोडिंग नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। ओवरलोडिंग से जुड़ी जानकारी भी आपस में साझा की जाएगी। इसके अलावा, सीमावर्ती राज्यों में स्थापित चेकगेट और चेकपोस्ट की सूची तथा यूपी की ओर जाने वाले वाहनों का विवरण नियमित रूप से साझा किया जाएगा। यह कार्य रियल टाइम डाटा के आधार पर सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों और खनन निदेशालय द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा, जिससे संयुक्त निगरानी और छापेमारी को आसानी से अंजाम दिया जा सके।

 

सीमावर्ती जिलों के अधिकारी हर महीने करेंगे समीक्षा……  ड्रोन सर्वे और जीपीएस ट्रैकिंग जैसी तकनीकों के जरिये पहले भी अवैध खनन रोकने के प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन अंतरराज्यीय सीमाओं वाले जिलों में यह अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि सभी संबंधित राज्यों के सीमावर्ती जिलों के डीएम, पुलिस, परिवहन और खनन विभाग के अधिकारी हर महीने समन्वय बैठक करेंगे। इन बैठकों में समीक्षा के बाद प्राप्त फीडबैक के आधार पर सभी राज्य टास्क फोर्स के साथ मिलकर संयुक्त प्रवर्तन कार्रवाई करेंगे।

 

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