कंपनियों के नए वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) स्थापित करने और उभरती प्रौद्योगिकी प्रतिभाओं की बढ़ती मांग से आईटी क्षेत्र में तेजी से भर्तियां बढ़ रही हैं। क्वेस कॉर्प की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में आईटी नौकरियों की कुल मांग सालाना आधार पर 16 फीसदी बढ़कर 18 लाख पहुंच गई। इनमें आधे से अधिक भर्तियां उभरती डिजिटल क्षमताओं पर केंद्रित थीं।
हालांकि, पारंपरिक तकनीकी कौशल की मांग 10 फीसदी से भी कम रही। इनमें लगातार गिरावट देखी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, जीसीसी ने घरेलू आईटी भर्ती बाजार में अपनी हिस्सेदारी को 2025 में बढ़ाकर कुल मांग का करीब 27 फीसदी कर लिया, जो पिछले वर्ष 15 फीसदी थी। हालांकि, फंडिंग में कमी के चलते स्टार्टअप में भर्तियां घटकर एक अंक में आ गईं। कुल मिलाकर, भर्ती की मांग उत्पादकता के लिए तैयार प्रतिभाओं की ओर ज्यादा रही।
आईटी क्षेत्र में भर्ती प्रक्रिया मुख्य रूप से टियर-1 शहरों में केंद्रित रही। यह 2025 में कुल मांग का 88-90 फीसदी थी। साथ ही, भर्ती में लगने वाला औसत समय बढ़कर 45-60 दिन हो गया, जो कड़ी प्रतिस्पर्धा और अधिक कठोर मूल्यांकन प्रक्रियाओं को दर्शाता है। एआई और मशीन लर्निंग साइबर सुरक्षा जैसी विशिष्ट कौशलों के लिए भर्ती की समय सीमा और भी बढ़कर 75-90 दिन के स्तर पर पहुंच गई।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग, क्लाउड इंजीनियरिंग और साइबर सुरक्षा कौशल की मांग पारंपरिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट पदों की तुलना में काफी तेजी से बढ़ी। इस साल अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी संबंधित पदों में वेतन वृद्धि सबसे अधिक देखी गई। जेनरेटिव एआई विशेषज्ञ एआई एथिक्स और गवर्नेंस लीड, फिनऑप्स पेशेवर, साइबर थेट इंटेलिजेंस विश्लेषक और प्लेटफॉर्म इंजीनियरिंग आर्किटेक्ट जैसे पदों पर वेतन में 10 से 40 फीसदी तक की
