माघ मेले में मौनी अमावस्या के पावन स्नान पर्व पर आस्था का ऐसा विराट दृश्य देखने को मिला जिसने अब तक के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। रविवार को संगम की रेती पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ने पर ऐसा लगा जैसे समय थम सा गया है। इस दौरान लगभग 4.52 करोड़ लोगों ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। माघ मेले के तीसरे प्रमुख स्नान पर्व पर त्रिवेणी तट पर भक्ति और विश्वास की लहरें पूरे वेग से उमड़ पड़ीं। पहली बार माघ मेले में मौनी अमावस्या के अवसर पर करीब साढ़े चार करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई।
एक दिन पहले ही एक करोड़ से अधिक लोगों ने स्नान कर लिया था। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने जल, थल और नभ से कड़ी निगरानी की। झुंसी, अरैल और संगम क्षेत्र के सभी घाटों पर सुव्यवस्थित ढंग से स्नान संपन्न कराया गया। वहीं, संगम तट पर जब आस्था और विश्वास का सैलाब उमड़ा तो सभी अनुमान और आकलन धरे रह गए। देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु सनातन संस्कृति में रमे नजर आए। कहीं भजन-कीर्तन, कहीं मंत्रोच्चार तो कहीं मौन साधना के साथ भक्ति के विविध रंग नजर आए। श्री राधा आध्यात्मिक सत्संग समिति की अध्यक्ष डॉ. राधाचार्या का कहना है कि मौनी अमावस्या का यह स्नान पर्व न सिर्फ माघ मेले के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया, बल्कि यह सिद्ध कर गया कि आस्था की शक्ति के आगे हर सीमा बौनी पड़ जाती l
