इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में मंगलवार को उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब दो छात्र गुटों के बीच जमकर मारपीट हो गई। घटना विश्वविद्यालय के बरगद लॉन की बताई जा रही है, जहां छात्रों का एक समूह यूजीसी से जुड़े मुद्दों पर आपस में चर्चा कर रहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चर्चा के दौरान कहासुनी हुई, जो कुछ ही देर में हाथापाई में बदल गई। दोनों पक्षों के कई छात्र घायल हुए हैं। घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में अफरा तफरी का माहौल रहा।
मामले को लेकर दोनों पक्षों की ओर से प्रॉक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत दी गई है। प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने पुष्टि की है कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन घटना ने विश्वविद्यालय में प्रशासनिक निगरानी और छात्र संवाद व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान में यूजीसी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का मारपीट में बदल जाना चिंताजनक है। यह सवाल उठाता है कि क्या विश्वविद्यालय परिसर में वैचारिक असहमति को संभालने की कोई प्रभावी व्यवस्था बची है। छात्रों की आवाज और अधिकारों से जुड़े मुद्दे संवाद से सुलझाए जाने चाहिए, न कि लाठी घूंसे से।
प्रॉक्टोरियल बोर्ड की जांच जरूरी है, लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है यह देखना कि परिसर में तनाव पैदा होने से पहले प्रशासन ने क्या भूमिका निभाई। अगर हर मुद्दा हिंसा तक पहुंचेगा, तो शैक्षणिक माहौल का भविष्य खुद सवालों के घेरे में है।
