इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई छात्र 12वीं में पढ़ रहा है तो केवल इस आधार पर उसे शून्य आय वाला नहीं माना जा सकता। आय का प्रमाण न होने पर मृतक को एक अकुशल श्रमिक माना जाना चाहिए। मजदूर के न्यूनतम वेतन के आधार पर कोर्ट ने मृतक के परिजनों को दिए जाने वाले मुआवजे को 2.60 लाख रुपये से बढ़ाकर 16,04,092 कर दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने कश्मीरी और तीन अन्य की याचिका पर दिया है। बुलंदशहर निवासी कश्मीरी के बेटे अंकित की उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) बस से 10 जून 2014 को दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। मृतक की मां, बहन और भाइयों ने मुआवजे के लिए मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण में अपील की। न्यायाधिकरण ने मृतक की वार्षिक आय मात्र 15,000 रुपये मानी और कुल 2,60,000 का मुआवजा निर्धारित किया था। परिजनों ने इसे कम बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मृतक को एक अकुशल श्रमिक माना। उस समय उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी 6,362 प्रति माह थी। कोर्ट ने उसकी आय में 50 प्रतिशत भविष्य की संभावनाओं को जोड़ते हुए मुआवजा राशि 16,04,092 रुपये नियत की। यूपीएसआरटीसी को निर्देश दिया है कि वह बढ़ी मुआवजा राशि पर सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ दो महीने के भीतर भुगतान करे।
