प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जेन-जी और जेन-अल्फा देश को विकसित भारत के लक्ष्य तक ले जाएंगे। वीर बाल दिवस पर प्रधानमंत्री ने उन्हें सलाह दी कि वे अपनी उम्र की परवाह किए बिना बड़ी चुनौतियों का सामना करें। पीएम ने दसवें सिख गुरु, गुरु गोविंद सिंह के बेटों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि साहिबजादे धार्मिक कट्टरता और आतंकवाद के खिलाफ वीरता की सर्वोच्च अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं।
साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि देश उन वीर पुत्रों को याद कर रहा है, जो भारत के अदम्य साहस और वीरता के शिखर का प्रतिनिधित्व करते हैं। पीएम मोदी ने कहा, संगठन से जुड़े इतने सारे युवा यहां मौजूद हैं। एक तरह से आप सभी जेन-जी और जेन-अल्फा हैं। आपकी पीढ़ी देश को विकसित बनाने के लक्ष्य तक ले जाएगी। मैं जेन-जी की क्षमताओं व आत्मविश्वास को देखता और समझता हूं, इसलिए मुझे आप पर पूरा भरोसा है। उम्र यह तय नहीं करती कि कौन छोटा है और कौन बड़ा। आप अपने कर्मों और उपलब्धियों से बड़े बनते हैं। कम उम्र में भी आप ऐसा काम कर सकते हैं, जिससे दूसरे प्रेरणा लें।
मोदी ने कहा, गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पाना देश का संकल्प है। भारतीयों के बलिदान, जन- वीरता की स्मृतियों को दबाया नहीं जाएगा। देश के नायकों और नायिकाओं को हाशिये पर नहीं धकेला जाएगा, इसलिए हम पूरे उत्साह के साथ वीर बाल दिवस मना रहे हैं।
वीर बाल दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्म ने अंडर -19 भारतीय क्रिकेट टीम के तूफानी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी समेत 20 बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान किए। वीरता, सामाजिक सेवा, पर्यावरण, खेल, कला एवं संस्कृति तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियों के लिए यह सम्मान दिया गया। पीएम मोदी ने बाद में इन सभी बच्चों से एक कार्यक्रम में मुलाकात की। उनके संघर्ष और हौसले की तारीफ की। हर वर्ष 26 दिसंबर को श्री गुरु गोविंद सिंह के साहिबजादों की शहादत में बौर बाल दिवस मनाया जाता है।
पीएम ने जोर दिया कि साहिबजादों के बलिदान की गाथा सबकी जुबान पर होनी चाहिए थी, पर आजादी के बाद भी औपनिवेशिक मानसिकता हावी रही। पीएम ने कहा, हमारी भाषाई विविधता शक्ति के रूप में उभर रही है। शीतकालीन सत्र में संसद में 160 सांसदों ने अपनी भाषाओं में भाषण दिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादों का सर्वोच्च बलिदान मुगलों के विरुद्ध भारत के अदम्य साहस को बताता है। साहिबजादों ने उम्र और परिस्थितियों की सीमाओं को तोड़ दिया। साहिबजादे चट्टान की तरह खड़े रहे और धार्मिक कट्टरता और आतंक के अस्तित्व को हो हिला दिया। ऐसे गौरवशाली अतीत वाला राष्ट्र, जिसकी युवा पीढ़ी को ऐसी प्रेरणाएं विरासत में मिली हैं, वह राष्ट्र क्या हासिल नहीं कर सकता।
