हवा में मौजूद प्रदूषण के महीन कण पीएम 2.5 और ओजोन अब गर्भ में पल रहे भ्रूण के विकास को भी प्रभावित कर रहे हैं। अमेरिका, भारत और अन्य देशों में हुए बड़े वैज्ञानिक अध्ययनों से स्पष्ट हुआ है कि गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में प्रदूषित हवा का संपर्क नवजात के वजन को घटा सकता है, अंगों के विकास को प्रभावित कर सकता है और भविष्य के लिए स्वास्थ्य समस्याओं की नींव रख सकता है।
रिपोर्ट वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित अध्ययन के निष्कर्षों को आम भाषा में, बिना तकनीकी जटिलता के प्रस्तुत करती है ताकि गर्भवती महिलाएं, उनके अभिभावक और परिवार यह समझ सकें कि वायु प्रदूषण गर्भ में पल रहे बच्चे को कब और किस तरह सबसे अधिक नुकसान पहुंचाता है।
वायु प्रदूषण को अक्सर फेफड़ों, दिल और आंखों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन अब वैज्ञानिक शोध यह दिखा रहे हैं कि इसका असर जीवन की शुरुआत से पहले ही शुरू हो जाता हैं। गर्भावस्था के दौरान जब महिला सांस के जरिये प्रदूषण के महीन कणों को अपने शरीर में लेती है, तो ये कण केवल उसके फेफड़ों तक सीमित नहीं रहतें। पीएम 2.5 जैसे अत्यंत सूक्ष्म कण रक्त के साथ प्लेसेंटा तक पहुंच सकते हैं, जो मां और भ्रूण के बीच पोषण और ऑक्सीजन का मुख्य माध्यम होता है।
अमेरिकी मेडिकल जर्नल जामा नेटवर्क में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि 2.5 माइक्रोन से भी छोटे कण सामान्य मास्क और शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणालियां भी इन्हें पूरी तरह रोक नहीं पातीं। वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि ये कण प्लेसेंटा में सूजन पैदा कर सकते हैं, डीएनए और प्रोटीन की संरचना को बदल सकते हैं और मां से भ्रूण तक पोषण के प्रवाह में रुकावट डाल सकते हैं।
