सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल इस कारण से नीलामी प्रक्रिया को रद्द नहीं किया जा सकता है कि नीलामी आयोजित करने वाले प्राधिकरण को लगाई गई उच्चतम बोली से अधिक बोली की उम्मीद थी।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने गोल्डन फूड प्रोडक्ट्स इंडिया की ओर से गाजियाबाद में मधुबन बापूधाम योजना में 3,150 वर्ग मीटर के औद्योगिक भूखंड के लिए लगाई गई बोली को रद्द करने का फैसला बरकरार रखा गया था।
कंपनी ने आरोप लगाया कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की ओर से 2023 में आयोजित नीलामी में सबसे ऊंची बोली लगाने के बावजूद उसकी बोली रद्द कर दी गई थी। जीडीए ने दावा किया कि नीलामी प्रक्रिया के दौरान उसने पाया कि उसी योजना में समान संपत्तियों को कंपनी की बोली में प्रस्तावित कीमत की तुलना में अच्छी कीमतें मिली थीं। इसलिए, नीलामी समिति ने अपीलकर्ता की बोली को रद्द करने और एक नई नीलामी आयोजित करने की सिफारिश की। कंपनी को भूखंड आवंटन का आदेश : शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के 24 मई, 2024 और 15 जुलाई, 2024 के आदेशों को रद्द कर दिया। साथ ही कंपनी को निर्देश दिया कि वह बयाना राशि को चार सप्ताह के भीतर दोबारा जमा करे।
जीडीए से कहा कि बयाना राशि जमा करने की तिथि से दो सप्ताह के भीतर वह उक्त कंपनी के पक्ष में संबंधित भूखंड के आवंटन का आदेश जारी करेगा और नीलामी प्रक्रिया को कंपनी के पक्ष में सम्पन्न करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा ।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि नीलामी प्रक्रिया की एक पवित्रता होती है। केवल वैध कारणों से ही उच्चतम बोली को अस्वीकार किया जा सकता है। यदि कोई वैध बोली आरक्षित मूल्य से अधिक है, तो उसे अस्वीकार करने का कोई तर्कसंगत कारण होना चाहिए। कोर्ट ने कहा, सिर्फ इसलिए कि नीलामी आयोजित करने वाले प्राधिकरण को उच्चतम बोली लगाने वाले की बोली से अधिक बोली की उम्मीद थी, उच्चतम बोली को खारिज करने का कारण नहीं हो सकता।
