उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि संभल में विवादित शाही जामा मस्जिद के बाहर स्थित कुआं सरकारी जमीन पर है, जिसे स्थानीय स्तर पर धरणी वराह कूप के रूप में जाना जाता है। मस्जिद समिति ने कुएं को पुनर्जीवित करने पर आपत्ति जताई है। राज्य सरकार ने कहा कि संभल शाही जामा मस्जिद भी सरकारी जमीन पर बनी है।
शीर्ष अदालत में दायर हलफनामे में राज्य सरकार ने कहा, यह कुआं विवादित धर्म स्थल के अंदर नहीं, बल्कि पास में है। इसका विवादित धार्मिक स्थल-मस्जिद से कोई संबंध नहीं है। यह उन ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण 19 कुओं में से एक है, जिनके संरक्षण व पुनरुद्धार के लिए संभल जिला प्रशासन ने 123. 65 लाख करोड़ रुपये की योजना बनाई है। कुछ कुओं के पुनरुद्धार की प्रक्रिया शुरू भी हो गई। इन कुओं को पुनर्जीवित करने से संभल क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। संभल जिला सांस्कृतिक व ऐतिहासिक रूप से बेहद अहम है।अदालत में दाखिल रिपोर्ट में सरकार ने कहा, याचिकाकर्ता ने भ्रामक तस्वीरें पेश की हैं, जो यह दर्शाने का प्रयास कर रही हैं कि कुआं विवादित धार्मिक स्थल परिसर के अंदर है। यह कुएं को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया विफल करने का प्रयास है, जो न सिर्फ अवैध है, बल्कि क्षेत्र के पारिस्थितिक संरक्षण व विकास के लिए भी हानिकारक है। याची ने गलत आवेदन के जरिये सार्वजनिक संपत्ति को निजी हक बनाने का प्रयास किया है सरकार ने नगर पालिकापरिषद की
रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा है कि जिन 19 कुओं को बहाल करने की मांग है, वे वर्षा जल संचयन पुनर्भरण व सामाजिक-सांस्कृतिक व धार्मिक मान्यताओं से जुड़े हैं।
