वाशिंगटन/नई दिल्ली। भारत से होने वाले निर्यात पर लगने वाला 25 फौसदी अमेरिकी शुल्क सात दिन टल गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ लगाने संबंधी कार्यकारी आदेश पर बृहस्पतिवार देर रात हस्ताक्षर कर दिए। खास बात यह है कि फार्मा उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और पेट्रोलियम उत्पादों को अभी शुल्क के दायरे में नहीं रखा है। ये उत्पाद भारत से अमेरिका को कुल निर्यात का आधे से अधिक हिस्सा हैं। रूस से तेल खरीद के कारणं जिस जुर्माने का जिक्र ट्रंप ने किया था, कार्यकारी आदेश में उसका कोई उल्लेख नहीं है।
नए टैरिफ से जो उत्पाद बाहर रखे हैं, उनमें तैयार दवाएं जैसे टैबलेट, इंजेक्शन व सिरप, इलेक्ट्रॉनिक्स में सेमीकंडक्टर, स्मार्टफोन, एसएसडी व कंप्यूटर शामिल हैं। स्मार्टफोन के मामले में सबसे अधिक फायदा एपल को होगा जो भारत में आईफोन तैयार कर अमेरिका में बेचती है। पेट्रोलियम उत्पादों में कच्चा तेल, जेट ईंधन, एलएनजी, परिष्कृत ईंधन, कोयले को टैरिफ से बाहर रखने का फैसला किया गया है।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा, मौजूदा स्थिति यह है कि ट्रंप के कार्यकारी आदेश के बाद भारत से अमेरिका को होने वाला आधे से अधिक निर्यात टैरिफ के दायरे से बाहर रखा गया है।. भारत और अमेरिका के बीच वर्ष 2024-25 में 131.8 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था। इसमें भारत का निर्यात 86.5 अरब डॉलर जबकि अमेरिका से होने वाला आयात 45.3 अरब डॉलर था। सूत्रों ने कहा, भारत के निर्यात का करीब 40 अरब डॉलर ही टैरिफ के दायरे में आएगा।
‘भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में अमेरिका को चार अरब डॉलर से अधिक मूल्य के 48.6 लाख टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया। रिलायंस इंडस्ट्रीज लि. अमेरिका को ईंधन का सबसे बड़ा निर्यातक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शुल्क से बाहर रखी गई वस्तुओं की सूची से स्पष्ट है कि भारत व अमेरिका व्यापार के मामले में निकट भविष्य में बहुत बड़ा बदलाव नहीं होने जा रहा है। रूस से तेल खरीद पर कोई जर्माना न लगाए जाने से भी भारत को राहत है। हालांकि, विशेषज्ञा न.
सतर्क करते हुए कहा कि भले ही अभी जुर्माने की चर्चा नहीं की गई, पर भविष्यके बारे में कुछ नहीं कह सकते। कृषि, डेयरी, जीएम उत्पादों पर कोई छूट नहीं देगा भारत : सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी टैरिफ के बाद भी भारत अपने मुद्दों पर टिका रहेगा और अमेरिका से कृषि उत्पादों, डेयरी और जीन संवर्धित उत्पादों पर शुल्क में किसी तरह की छूट नहीं देगा। सूत्रों ने कहा, अमेरिकी डेयरी क्षेत्र में पशु आहार में मांस के इस्तमाल के कारण भारत के लिए ऐसे उत्पादों पर शुल्क रियायत देना संभव नहीं है।
