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तीन महीने में बदला फैसला: सिस्मिक जोन-6 मैप वापस, आईएस 1893-2016 फिर लागू

भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने भारत के लिए उच्च जोखिम वाले नए भूकंपीय (सिस्मिक) जोन-6 वाले मैप को रद्द कर दिया है। केंद्र सरकार ने तीन महीने पहले ही नए भूकंपीय जोन लागू करने का एलान किया था। इसमें जम्मू-कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक पूरे हिमालयी क्षेत्र को सबसे अधिक भूकंप जोखिम वाले जोन-छह में रखा गया था और देश के करीब 60% हिस्से को माध्यम से उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में शामिल किया था।

अब आईएस 1893 के 2024 संस्करण को वापस ले लिया गया है जिसमें भवन निर्माण और सुरक्षा के लिए अधिक सख्त मानक तय किए गए थे। एक महत्वपूर्ण नियामकीय बदलाव में, 2016 वाला पुराना मानक आईएस 1893 फिर से लागू कर दिया गया है। तीन मार्च को जारी अधिसूचना में भारतीय मानक ब्यूरो ने पुष्टि की कि 6 नवंबर, 2025 को जारी संशोधित आईएस 1893:2025 संबंधी अधिसूचना तत्काल प्रभाव से वापस ले ली गई है।

सूत्रों के अनुसार, यह फैसला कैबिनेट सचिवालय के दखल के बाद लिया गया। दरअसल, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने नए नियमों पर गंभीर चिंता जताई थी। कहा, नए मानकों को लागू करने से निर्माण लागत में भारी बढ़ोतरी होगी और हितधारकों से पर्याप्त विचार-विमर्श भी नहीं किया गया।

चरणबद्ध तरीके से लागू होने चाहिए थे नियम : सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट सचिवालय ने यह भी कहा कि भूकंपीय कोड में बदलाव व्यापक विचार-विमर्श और वित्तीय प्रभाव के विस्तृत आकलन के बाद ही किया जाना चाहिए। इसके अलावा, नए नियमों को एकाएक लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए। आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने कैबिनेट सचिवालय के समक्ष नए कोड पर गंभीर सवाल उठाए। मंत्रालय ने कहा कि नए कोड से निर्माण लागत में काफी वृद्धि हो सकती है, आवासीय भवनों के लिए यह बढ़ोतरी 20 प्रतिशत से अधिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए 50 प्रतिशत तक हो सकती है।

जयपुर, अलवर, अहमदाबाद जैसे शहरों पर भी पड़ता असर… पहले भारत को चार भूकंपीय जोनों-2, 3, 4 और 5 में बांटा गया था। नवंबर 2025 में जारी अधिसूचना में जोन-छह जोड़ा गया था। इसमें जम्मू-कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक परे हिमालयी क्षेत्र को सबसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में रखा गया था। साथ ही, दो भूकंपीय जोनों की सीमा पर स्थित शहरों को उच्च जोखिम वाले जोन में माना गया था। इसका असर जयपुर, अहमदाबाद और अलवर जैसे कई शहरों पर पड़ता।

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