नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष को संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस में शामिल हुए बीआरएस के 10 विधायकों के खिलाफ लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर तीन महीने के भीतर-फैसला करने का निर्देश दिया।
शीर्ष अदालत ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा करने वाले दलबदलुओं के खिलाफ कार्रवाई विफल करने के लिए ऐसी कार्यवाही में अत्यधिक देरी करते हैं। संसद को विधायकों की अयोग्यता की वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने 3 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सीजेआई जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि राजनीतिक दलबदल राष्ट्रीय चर्चा का विषय रहा है। अगर इसे रोका नहीं गया तो यह लोकतंत्र को बाधित कर सकता है। किसी भी विधायक को अयोग्यता कार्यवाही को लंबा खींचने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। पीठ ने बीआरएस नेता केटी रामा राव और पाडी कौशिक रेड्डी की याचिका पर अपना फैसला सुनाया
