देश के फ्लाइंग सिख कोरोना से हारे जीवन की जंग
कोरोना वायरस से 30 दिन तक संघर्ष के बाद फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह ने शुक्रवार रात पीजीआई में आखिरी सांस ली ।5 दिन पहले उनकी पत्नी और देश की पूर्व वॉलीबॉल कप्तान निर्मल सिंह का भी संक्रमण से निधन हो गया था। 1958 राष्ट्र मंडल खेलो और चार एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता मिल्खा सिंह 24 मई को अस्पताल में भर्ती हुए थे ।
30 मई को उन्हें छुट्टी भी मिल गई थी लेकिन 3 जून को उन्हें दोबारा कोविड वार्ड में भर्ती कराया गया। कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आने पर उन्हें सामान्य आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। गुरुवार रात उन्हें अचानक बुखार आ गया और ऑक्सीजन का स्तर भी गिर गया ।शुक्रवार दिन में हालत फिर बिगड़ी देर रात में आखिरी सफर पर निकल पड़े।
मिल्खा सिंह को उड़न सिख का खिताब पाकिस्तान में मिला था। पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल अयूब खान ने उन्हें उड़न सिख जिसे फ्लाइंग सिख भी कहते हैं कि पदवी से नवाजा था ।सन 1960 में मिल्खा सिंह को पाकिस्तान की ओर से लाहौर में दौड़ने का आमंत्रण मिला लेकिन भारत-पाक बंटवारे के बाद हुए दंगों से दुखी मिल्खा सिंह ने निमंत्रण को ठुकरा दिया।

वही मिल्खा सिंह की बेटी सोनिया सांवलका ने अपने पिता के जीवन पर रेस ऑफ माय लाइफ नाम से किताब लिखी। जो साल 2013 में प्रकाशित हुई थी ।इस किताब के प्रकाशित होने के बाद फिल्म निर्माता राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने उनके जीवन पर फिल्म “भाग मिल्खा भाग” बनाने का निर्णय लिया ।फिल्म बनाने की अनुमति देने के बदले निर्माता राकेश ओमप्रकाश मेहरा से मिल्खा सिंह ने मात्र ₹1 का नोट लिया था ।₹1 की खास बात यह थी ₹1 का यह नोट साल 1958 का था ।
जब मिल्खा ने राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार स्वतंत्र भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था ।₹1 का यह नोट पाकर मिल्खा सिंह भावुक हो गए थे। यह नोट उनके लिए एक कीमती याद की तरह था ।इस फिल्म में अभिनेता फरहान अख्तर ने मिल्खा की भूमिका निभाई थी ।फिल्म को देखकर मिल्खा सिंह ने कहा था कि युवाओं को खेलों में देश के लिए मेडल लाने की प्रेरणा मिलेगी।
Samiksha
