पहलगाम आतंकी हमले की साजिश में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और वहां की सेना की भी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा के साथ मिलीभगत थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच में यह खुलासा हुआ है। एनआईए ने कश्मीर घाटी में आतंकियों के करीब 20 मददगारों यानी ओवरग्राउंड वर्करों (ओजीडब्ल्यू) की पहचान की है।आरोप है कि इन मददगारों ने हमलावर आतंकियों को रसद व पनाह से लेकर हर तरह की मदद मुहैया कराई। एजेंसी इन सभी से पूछताछ कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, एनआईए जम्मू की कोट भलवाल जेल में बंद दो ओजीडब्ल्यू निसार अहमद उर्फ हाजी और मुश्ताक हुसैन से भी पूछताछ करेगी। सूत्रों ने बताया, जांच में पता चला कि लश्कर ने आईएसआई व पाकिस्तानी सेना के साथ बायसरन में हुए हमले की साजिश रची थी। दो हमलावर हाशमी मूसा उर्फ सुलेमान और अली भाई उर्फ तल्हा पाकिस्तानी नागरिक हैं। ये पाकिस्तान में बैठे अपने सरगनाओं के लगातार संपर्क में थे और उनसे निर्देश ले रहे थे।
जांच में खुलासा हुआ कि हमलावर हमले से कुछ हफ्ते पहले ही सीमापार से घुसपैठ कर कश्मीर में दाखिल हुए थे। उन्हें इसमें ओजीडब्ल्यू ने मदद की। स्थानी मददगारों ने ही आतंकियों को रहने की जगह दिलाने के साथ इलाके की जानकारी दी और आने-जाने में मदद की। सूत्रों का कहना है ,आतंकियों ने बायसरन घाटी , अरुण वह बेताब घाटी और एक मनोरंजन पार्क की रेकी की थी सुरक्षा व्यवस्था कम होने के चलते हमलावरों ने बायसरन को निशाना बनाया।
