प्रयागराज। करछना बवाल में निर्दोषों की गिरफ्तारी का आरोप व उनकी रिहाई संबंधी मांगपत्र लेकर एडीएम सिटी कार्यालय पहुंचे लोगों की पुलिस से झड़प हो गई। वहां धक्का मुक्की के साथ खींचतान भी हुई। भाकपा माले ने अपने पदाधिकारी से मारपीट किए जाने का आरोप लगाया। वहीं पुलिस अफसर आरोपों को गलत बताते रहे।
29 जून को करछना के भड़ेवरा बाजार में जमकर बवाल हुआ था। भाकपा माले के जिला प्रभारी सुनील मौर्य ने आरोप लगाया कि इस मामले में पुलिस ने असांविधानिक व बर्बर ढंग से 70 से अधिक निर्दोष दलित आदिवासी नौजवानों को गिरफ्तार कर लिया।
उनकी रिहाई की मांग को लेकर ही पार्टी के राज्यव्यापी प्रतिरोध के तहत मंगलवार को जिला मुख्यालय पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन व ज्ञापन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने राज्य कमेटी सदस्य व आइसा प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार के साथ मारपीट की। उन्हें जबरन गिरफ्तार करने की भी कोशिश की।
यह देखकर जेल में बंद दलित नौजवानों की माताएं व महिला अधिवक्ता जो प्रदर्शन में शामिल थीं, वे पुलिस से भिड़ गईं और मनीष को घेरकर पुलिस के हमले से बचाया। आरोप यह भी है कि मौके पर मौजूद पुलिस कहती नजर आई कि वह इस मुद्दे पर किसी भी तरह का कोई ज्ञापन या प्रदर्शन आयोजित नहीं करने देगी।
मनीष ने कहा कि दलित नौजवानों की रिहाई सुनिश्चित होने तक लडाई जारी रहेगी। प्रदर्शन में विश्वविद्यालय के छात्र, अधिवक्ता और आइसा-आरवाईए, इंसाफ मंच, भाकपा माले के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे। वहीं घटना से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। हालांकि अमर उजाला इसकी पुष्टि नहीं करता है।
