शिमला/रुद्रप्रयाग/चमोली। उत्तराखंड औरहिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में बादल फटने और भूस्खलन के कारण भारी तबाही हुई। कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई। 12 अन्य लापता हैं। मृतकों में मणिमहेश के चार यात्री शामिल हैं। यही नहीं, हिमाचल में करीब 7000 श्रद्धालु भरमौर, हड़सर में, जबकि मनाली में 900 श्रद्धालु फंसे हैं। पंजाब, हरियाणा और जम्मू कश्मीर में भी हालात बदतर हैं।टिहरी के सीमांत क्षेत्र गेंवाली में शुक्रवार तड़के बादल फटने से मलबा और बोल्डर बहकर आने से भागीरथी नदी का प्रवाह बाधित हो गया। इससे 100 मीटर तक झोल बन गई है। वहीं, रुद्रप्रयाग के पूर्वी बांगर क्षेत्र में भूस्खलन से छेनागाड़ का पड़ाव तबाह हो गया है। पहाड़ी से आए सैलाब में 15 से अधिक दुकानें और मकान बह गए, जिससे 8 लोग लापता हो गए। इनमें गार नेपाली मजदूर और एक वनकर्मी शामिल हैं। उत्तराखंड में छह लोगों की मौत हुई है। चमोली में भूस्खलन से मकान ढहने से पति-पत्नी की मलबे में दबकर मौत हो गई।दिल्ली-एनसीआर में शुक्रवार को जमकर बारिश हुई। जलभराव से लोग जाम से जूझते रहे। अगस्त माह में दिल्ली में 15 साल बाद रिकॉर्ड 400.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। वर्ष 2010 में 455.8 मिमी बारिश हुई थी। दिल्ली में यमुना उफान पर है। शुक्रवार शाम जलस्तर 204.55 मीटर रहा।हिमाचल में पांच लोगों की जान गई है। आनी के पटारना गांव में तीन मकान भूस्खलन की चपेट में आने से एक महिला की मौत हो गई। मणिमहेश के चार श्रद्धालुओं की मौत के साथ 24 अगस्त से अब तक 11 की जान गई है।जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग शुक्रवार को लगातार चौथे दिन बंद रहा। करीब 2.000 वाहन वहां अटके हैं। गुरेज में बादल फटने से मुख्य सड़क का बड़ा हिस्सा बह गया। इससे तुलैल क्षेत्र के कई गांवों का संपर्क टूट गया है।पूर्वी राजस्थान में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई। बांसवाड़ा जिले के सज्जनगढ़ में शुक्रवार सुबह तक 24 घंटे में सर्वाधिक 136 मिमी बारिश हुई।पंजाब में बारिश से व्यास, सतलुज समेत कई नदियां उफान पर हैं। दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में हैं। 3-4 दिन भारी बारिश जारी रहने के आसार है।
