नई दिल्ली/इंफाल/जम्मू। मणिपुर में मानसून जाने से पहले कहर बरपा रहा है। बीते 24 घंटों के दौरान मूसलाधार बारिश के कारण राज्य के ज्यादातर हिस्ररों में आकस्मिक बाढ़ आ गई है और जगह-जगह भूस्खलन हुआ है। इससे कई घर और रिहायशी कॉलोनियां जलमग्न हो गई हैं। प्रमुख नदियों का जल स्तर बढ़ गया है। सिक्किम में भूस्खलन से एक ग्राम प्रधान की मलबे में दबने से मौत हो गई है। वहीं, जम्मू-कश्मीर के कटड़ा में भी भारी बारिश के कारण माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर फिर भूस्खलन हुआ है।
इंफाल में अधिकारियों ने बताया कि मणिपुर के पूर्वी इंफाल में यिंगांगपोकपी, संटी खोंगबल और सबुंगखोक खुनोउ तथा पश्चिमी इंफाल में काकवा और सागोलबंद के कई इलाके भारी बारिश के कारण जलमग्न हो गए हैं। नोनी जिले के अवांगखुल के साथ-साथ सेनापति और कामजोंग के पहाड़ी जिलों से भी भूस्खलन हुआ है। इंफाल नदी, नम्बुल और इरिल सहित प्रमुख नदियों का जलस्तर काफी बढ़ गया है, लेकिन अभी खतरे के निशान तक नहीं पहुंचा है। जल संसाधन विभाग स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है।
नगालैंड में भी भारी बारिश के चलते कीचड़ आने से राष्ट्रीय राजमार्ग 29 पर यातायात बाधित हुआ है। एक वेली पुल बाढ़ के पानी में डूब गया है, जिससे दो गांवों के बीच आवाजाही ठप हो गई है। सिक्किम के ग्यालशिंग जिले में लगातार बारिश के कारण हुए भूस्खलन में 47 वर्षीय पंचायत अध्यक्ष की मौत हो गई। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह घटना शनिवार शाम को उस समय हुई जब सरदुंग लुंगजिक ग्राम पंचायत के अध्यक्ष राजेन गुरुंग अपने घर के पास हुए एक भीषण भूस्खलन के मलबे में दब गएधर्मनगरी में कटड़ा, भवन और त्रिकुटा की पहाड़ियों पर शनिवार से हो रही मूसलाधार बारिश से माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर फिर जगह-जगह भूस्खलन हुआ है। सांझी छत व भवन मार्ग पर भारी मात्रा में मलबा आ गया है। श्राइन बोर्ड के कर्मचारी मलबा हटाने में जुटे हैं। यात्रा मार्ग बंद होने से किसी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।
वारिश और खराब मौसम के कारण श्राइन बोर्ड ने पहले ही रविवार से दोबारा शुरू होने वाली यात्रा अगले स्थगित कर दी थी। यात्रा पिछले 20 दिनों से बंद है, जब अर्धकुंवारी के पास भीषण भूस्खलन में 34 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी।
